डीडीहाट नगर में गांव से लाया दूध बेचते गोविंद सिंह
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गांवों के पशुपालकों से दूध एकत्र कर डीडीहाट नगर में बेचने आने वाले मल्लाढुंगा निवासी गोविंद सिंह के काम पर भी नोटबंदी का खासा असर पड़ने लगा है। वह कई दुकानों और घरों में दूध देते हैं, लेकिन इस बार उनको भुगतान प्राप्त करने में बड़ी कठिनाई हो रही है। जिन घरों को उन्होंने महीने भर दूध दिया था, वह भुगतान में या तो टालमटोल कर रहे हैं या फिर दो हजार का नोट दिखा रहे हैं। दो हजार के नोट में से दूध के पैसे काटकर लौटाने के लिए उनके पास छोटे नोट नहीं हैं।
गोविंद सिंह ने स्वरोजगार के तौर पर दुग्ध व्यवसाय को चुना था। इससे एक फायदा यह हो रहा था कि गांव के पशुपालकों को दूध का पैसा मिल रहा था और गोविंद सिंह का बाजार तक दूध पहुंचाने का मेहनताना मिल जाता था। वह मल्लाढुंगा से रोजाना पांच किलोमीटर का पैदल सफर तय कर पहले रोड हेड तक आते हैं। वहां से किसी वाहन में बैठकर दूध का केन लेकर डीडीहाट पहुंचते हैं। उनकी दिनचर्या ऐसी है कि वह सुबह करीब दो घंटे के भीतर दुकानों और लोगों के घरों में 35 लीटर दूध बांटकर लौट जाते थे। महीना समाप्त होते ही उनको हर घर और दुकान से दूध का पैसा मिल जाया करता था। इसी रकम को वह पशुपालकों में बांटते और कुछ राशि अपने लिए बचाकर परिवार का खर्चा चलाते थे। आठ नवंबर की रात हुई नोटबंदी का सीधा असर गोविंद सिंह के काम पर भी पड़ गया है।
गोविंद सिंह ने बताया कि अधिकांश दुकानों और घरों से महीने के अंत में दूध का भुगतान नहीं मिल पाया। जो लोग भुगतान कर भी रहे हैं तो दो हजार का नोट दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब काम को रुटीन में ला पाना कठिन हो गया है। जिन पशुपालकों से वह दूध एकत्र करते हैं, उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है। गोविंद सिंह का कहना है कि सरकार ने नोटबंदी तो की लेकिन छोटे नोटों की सप्लाई भी रोक दी। इसी से सारी व्यवस्था प्रभावित हो गई है। उन्होंने कहा कि तत्काल छोटे नोट बैंकों में दिए जाएं, ताकि छोटा काम करने वालों के सामने दिक्कत न आए।