सरकार की एस्मा लगाने के फैसले की परवाह किए बिना बृहस्पतिवार से जिले की नर्सेज बेमियादी हड़ताल पर चली गई हैं। हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा है। राहत की बात यह रही कि जिला महिला अस्पताल में कार्यरत सात नर्सेज इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं। हड़ताली नर्सेज ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की अध्यक्ष दीपिका डीन ने दावे के साथ कहा कि जिले की 70 नर्सेज हड़ताल पर हैं। कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं की जाती हड़ताल जारी रहेगी। प्रदर्शन में संगठन की सचिव दीपा रावत, विनीता सिंह, सुमन गुंज्याल, तारा टंडन, माया रावत, विमला चुफाल, सुनीता सक्सेना समेत करीब तीन दर्जन नर्सेज शामिल हुई। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने अब तक नर्सेज की हड़ताल से निपटने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
उधर, चंपावत में भी नर्सेज एसोसिएशन ने बृहस्पतिवार से बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है। लगातार चौथे दिन नर्सों के कार्य बहिष्कार से स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी से उतरने लगी है। वैकल्पिक व्यवस्था के दावे हवा हवाई नजर आए। जिला अस्पताल में सभी नर्सों ने बृहस्पतिवार को भी प्रदर्शन किया। नर्सेज एसोसिएशन जिलाध्यक्ष सविता जोशी की अगुवाई में अनिश्चितकालीन हड़ताल में जाने वालों में हिमांगी सिंह, सुधा पांडेय, बसंती तिवारी, शीला आर्या, कांता, अनीता राय, सपना, मंजू मिश्रा, कविता, मंजू कैड़ा आदि नर्सें शामिल रही। इसके अलावा टनकपुर, बनबसा में भी नर्सों की हड़ताल के कारण मरीजों को दिक्कतें हुई। अलबत्ता जिला अस्पताल में नर्सों के स्थान पर फार्मेसिस्टों को मरीजों को देखने की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। चिकित्साधीक्षक डा.एसबी ओली के अनुसार प्रशिक्षु फार्मेसिस्टों की सेवाएं भी ली जा रही हैं। नियमित फार्मेसिस्टों की दो शिफ्टों में ड्यूटी लगाई जा रही है।