खोजबीन करते एसएसबी 11वीं वाहिनी के जवान
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बस्तड़ी से 8 असम रेजीमेंट के जवान हट गए हैं। अब सेना का सिर्फ मेडिकल कैंप सिंघाली में लगा है। बृहस्पतिवार को सेना ने कैंटीन का सामान भी पहुंचाया है। बृहस्पतिवार को एसएसबी 11वीं वाहिनी, आईटीबीपी सातवीं वाहिनी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवान खोजबीन के काम में लगे रहे। अब टूटे घरों के पास ही खोजबीन का काम किया जा रहा है। शासन-प्रशासन ने शुक्रवार से खोजबीन का काम बंद करने का फैसला लिया है। अब बस्तड़ी से एसएसबी, आईटीबीपी समेत अन्य एजेंसियां हट जाएंगी।
8 असम रेजीमेंट के कर्नल जे चौधरी ने बताया कि ऐसी आपदाओं के समय सेना 72 घंटे तक ही रेस्क्यू अभियान चलाती है, लेकिन बस्तड़ी में विशेष परिस्थिति को देखते हुए 92 घंटे तक सेना ने रेस्क्यू अभियान चलाया था। उन्होंने कहा कि सेना का मेडिकल कैंप फिलहाल लगा रहेगा। बृहस्पतिवार को स्थानीय लोगों के सुझाव पर एसएसबी, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस के जवानों ने मकानों के आसपास के इलाकों में जेसीबी से खोजबीन की। अब मलबे से बर्तन, कपड़े जैसा सामान ही मिल रहा है। बस्तड़ी में 6 मकान बह गए थे और गांव के लगभग सभी मकानों को खतरा पैदा हो गया था। लोगों की सारी संपदा मलबे की भेंट चढ़ गई है। अब इसका मिल पाना संभव नहीं है।
मलबे से लाखों के जेवरात मिले
चंद्रबल्लभ भट्ट के मकान के पास जेसीबी लगाकर की गई खोजबीन के दौरान सोने और चांदी के जेवरात मिले हैं। यह जेवरात चंद्रबल्लभ को सौंप दिए गए हैं। चंद्रबल्लभ संपन्न परिवार से थे। उनके मकान के पास बृहस्पतिवार को जब मलबा हटाया गया तो मलबे में दबे पांच बक्से मिले। कुछ बक्सों में जेवरात रखे थे।