नोटबंदी के कारण डीडीहाट में ठप पड़ा टेलरिंग का काम
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नोटबंदी के कारण छोटे व्यवसायियों की मुसीबत बढ़ने लगी है। डीडीहाट में टेलरिंग का काम करने वाले व्यवसायियों का कहना है कि आठ नवंबर के बाद नए कपड़े सिलाने वालों की संख्या में भारी गिरावट आई है। लगन के इस महीने में पिछले साल तक वह 35 से 40 तक सूट तैयार करते थे, लेकिन इस बार यह संख्या मात्र 7 में सिमट कर रह गई है।
आठ नवंबर को नोटबंदी का आदेश हुआ और 15 नवंबर से बारातों का सीजन शुरू हो गया। तब से इस छोटे से व्यवसाय में लगभग 80 फीसदी तक की गिरावट आई है। अब तो स्थिति यह है कि जिन लोगों ने नोटबंदी से पहले कपड़े सिलाने के लिए दिए थे, वह भी पैसे की कमी के कारण उनको लेने नहीं आ रहे हैं। जो लोग आ भी रहे हैं तो वह दो हजार का नोट दिखा रहे हैं।
टेलर मास्टर मनोहर राम ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या कारीगरों को भुगतान की आ गई है। उनका कहना है कि लंबे समय से साथ काम कर रहे लोगों को हटाया भी नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति रुपए के लिए परेशान है। बैंकों से जो थोड़ी रकम मिल रही है उसे वह घर के खर्च के लिए बचा रहा है। कपड़ा, सूट खरीदने की तरफ लोगों का ध्यान इस समय नहीं जा रहा है। टेलर मनोहर का कहना है कि यदि सरकार नोटबंदी के साथ ही बैंकों में पर्याप्त कैश उपलब्ध करा देती और लोगों को भुगतान की छूट देती तो बाजार पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ता। वह मानते हैं कि यह काम बिना तैयारी के हुआ है। वरना ऐसी नौबत नहीं आती।
रेडीमेड का व्यवसाय भी चौपट
टेलरिंग का काम तो प्रभावित हुआ ही है, रेडीमेड के कारोबारियों का काम भी ज्यादा चौपट हो रहा है। इस बार सर्दियों में स्वेटर, जैकेट की बिक्री ठप पड़ी है। व्यापारी सुबह दुकान खोल रहे हैं, लेकिन ग्राहक नहीं आ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि 30 दिसंबर के बाद स्थिति में सुधार होगा, ऐसी उम्मीद नजर नहीं आ रही है।