धारचूला में शहीद ललित सिंह के बेटे को सम्मानित करते आईटीबीपी के अधिकारी
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जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में वर्ष 2000 में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए आईटीबीपी के हवलदार ललित सिंह गर्ब्याल की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में उनकी पत्नी रुक्मिणी देवी नहीं पहुंच पाई। इसकी वजह कार्यक्रम की सूचना देर से देना बताया गया। लोगों में इस बात को लेकर काफी गुस्सा है। उनका कहना है कि आईटीबीपी के अधिकारियों ने मात्र औपचारिकता निभाई और शहीद के बड़े बेटे त्रिभुवन सिंह को शॉल भेंट कर कार्यक्रम संपन्न कर दिया।
शहीद दिवस के इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए आईटीबीपी सातवीं वाहिनी के निरीक्षक अजीत सिंह, उपनिरीक्षक लक्ष्मण सिंह, सहायक उपनिरीक्षक दीपक गुंज्याल और सात जवान यहां पहुंचे थे। गर्ब्यांग जनमिलन केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में शहीद के बेटे को सम्मानित किया गया। बताया कि शहीद ललित सिंह एक अच्छे खिलाड़ी थे। वह कराटे के प्रशिक्षक थे। सीमा पर भी उन्होंने बहादुरी दिखाई थी। कार्यक्रम में उपप्रधान गोपाल सिंह, ग्राम सेवा समिति के अध्यक्ष गोविंद गर्ब्याल, दलबहादुर सिंह, पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंधक पीएस गर्ब्याल, महिला मंगल दल की दीना गर्ब्याल, महिराज गर्ब्याल, पुष्कर गर्ब्याल, दशरथी कुटियाल आदि उपस्थित थे।
इधर, शहीद दिवस की समय से कोई सूचना नहीं देने पर लोगों ने नाराजगी जताई। आईटीबीपी के निरीक्षक के माध्यम से कमांडेंट को भेजे ज्ञापन में कहा गया कि कार्यक्रम की सूचना शनिवार सुबह नौ बजे दी गई। इस कारण शहीद की 55 वर्षीय पत्नी तक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाई। उप प्रधान गोपाल सिंह, महीराज गर्ब्याल आदि ने कहा कि हर साल आईटीबीपी द्वारा शहीद के सम्मान को औपचारिकता भर मनाया जाता है।
शहीद के दोनों बेटे सरकारी सेवा में
शहीद ललित सिंह गर्ब्याल का बड़ा बेटा त्रिभुवन सिंह नैनीताल में सरकारी विद्यालय में शिक्षक हैं। उनकी पत्नी बबीता भी शिक्षिका हैं। छोटा बेटा ईश्वर सिंह उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत है। परिवार में शहीद की पत्नी रहती हैं। वह अब गर्ब्यांग गांव को छोड़कर धारचूला नगर के नजदीक खोतिला कस्बे में रहती हैं। परिवार में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं है।