बीच रोड पर इस तरह खराब हो जाते हैं वाहन
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जिले के आंतरिक मार्गों पर वाहन चेकिंग की व्यवस्था नहीं है। यहां बिना फिटनेस चेक किए ही वाहनों का संचालन होता आया है। इसके अलावा चालकों की लापरवाही, नशे में वाहन चलाने जैसे मामलों की जांच भी कभी नहीं होती। पुलिस के सारे चेकिंग अभियान नगरों और थाना क्षेत्रों तक ही सीमित हैं। आंतरिक मार्गों पर चेकिंग के लिए न तो उसके पास ढांचा है और न इतने स्थानों पर वह चेकिंग कर पाती है। अब लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के बाद यह बात सामने आने लगी है कि आंतरिक मार्गों पर भी वाहनों के चेकिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
जिले में मार्च में अब तक सड़क हादसों में 11 लोगों की जान चली गई और इतने ही जख्मी हो गए। सारी दुर्घटनाएं आंतरिक मार्गों पर ही हुई हैं। इन सुनसान इलाकों में न तो कभी कोई चेकिंग होती है और न गति पर नियंत्रण रहता है। यदि चालक नशे में हो तो उसकी कभी जांच नहीं होती। मोटे तौर पर यही माना जाता है कि ज्यादातर दुर्घटनाएं चालकों की लापरवाही से ही होती हैं। इसके अलावा वाहनों के फिटनेस की जांच न होना भी प्रमुख कारण रहता है। जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा ने हालांकि लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा है कि वाहनों की फिटनेस की जांच, नशे में वाहन चलाने वाले ड्राइवरों की जांच के लिए आकस्मिक छापे मारे जाएं और ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
चेकिंग के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी नवीन सिंह का कहना है कि वाहनों की चेकिंग के लिए उनके पास पूरे जिले में सिर्फ एक टीम है। यह टीम जिस रूट पर भी जाती है वहां पर वाहनों की चेकिंग की जाती है। उन्होंने बताया कि हर नए वाहन को पहले दो साल में, उसके बाद हर साल फिटनेस चेक कराना जरूरी है। यदि किसी वाहन की फिटनेस की चेकिंग नहीं हुई हो तो उस पर पांच हजार रुपए जुर्माना लगाया जाता है। साथ ही ऐसे वाहन को सड़क पर चलने से रोका जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि 29 दिसंबर 2016 को जारी नए आदेश के मुताबिक अब वाहन की फिटनेस की जांच निर्धारित अवधि में न होने पर 50 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना वसूल किया जाएगा।
ओवरलोडिंग पर नियंत्रण का दावा
पुलिस का कहना है कि वाहनों में ओवरलोडिंग पर नियंत्रण लगा है। लगातार चेकिंग से और जगह-जगह थाने तथा चौकियां खुलने से भी इसका असर पड़ा है। वाहनों में क्षमता से ज्यादा सवारी ले जाने पर तत्काल चालान और जुर्माना लिया जाता है। दो से अधिक बार चालान होने पर वाहन सीज किए जाते हैं। इसका असर वाहन चालकों पर पड़ा है। दूसरा पक्ष यह है कि जिले में यात्रियों को ढोने वाले निजी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब लोगों को ओवरलोड वाहनों में जाने की मजबूरी नहीं है।