आपदा से हर साल स्कूल भवन क्षतिग्रस्त होते रहते हैं, लेकिन इनकी मरम्मत के लिए धनराशि नहीं मिल पाती। इस कारण कई स्कूल भवन तो ऐसे होते हैं जिनके लिए कभी भी धन मंजूर नहीं हो पाता। विद्यालय भवनों की दुर्दशा से भी छात्रसंख्या में गिरावट आ रही है। सर्व शिक्षा अभियान से संचालित प्राथमिक स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए केंद्र सरकार से धनराशि मिलती है। इस बार इस राशि में इतनी कटौती कर दी गई है कि सभी विद्यालय भवनों की मरम्मत कर पाना संभव नहीं होगा।
सर्व शिक्षा अभियान की ओर से संचालित 156 प्राथमिक स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए धनराशि का प्रस्ताव केंद्र सरकार को गया है, लेकिन इस मद में अब तक धनराशि नहीं मिल पाई है। पिछले साल के जो प्रस्ताव गए थे, उनमें से मात्र चार स्कूल भवनों की मरम्मत की स्वीकृति मिली है, लेकिन इनके लिए भी धन नहीं आया है। सर्व शिक्षा अभियान के अभियंता विमल पांडे का कहना है कि केंद्र सरकार को भेजी जाने वाली रिपोर्ट हर साल अपडेट करनी पड़ती है। इसमें मरम्मत किए गए भवनों की संख्या कम की जाती है और नए क्षतिग्रस्त भवनों की संख्या को जोड़ दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि मरम्मत किए गए भवनों की संख्या तो नाममात्र की होती है, जबकि नए क्षतिग्रस्त भवनों की संख्या बढ़ती रहती है। सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना अधिकारी शौकत अली ने बताया कि स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए शासन से धनराशि न मिलने से काफी कठिनाई हो रही है। जिले में 156 प्राथमिक स्कूल भवन ऐसे हैं, जो जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। इसका असर पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।
पिथौरागढ़ जिले के हिस्से आएंगे 20 लाख
सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना अधिकारी शौकत अली ने बताया कि केंद्र सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए इस बार जितनी धनराशि मंजूर की है, उसमें से पिथौरागढ़ जिले के हिस्से में मात्र 20 लाख रुपये आएंगे। इनमें चार स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए 4.30 लाख रुपये की अब तक मंजूरी मिल पाई है, लेकिन धन नहीं मिला है। पूरे राज्य को इस मद में सिर्फ 1.5 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि पिथौरागढ़ जिले में ही प्रति स्कूल भवन की मरम्मत के लिए कम से कम एक लाख रुपये चाहिए।
पिछले साल हुई 29 भवनों की मरम्मत
सर्व शिक्षा अभियान से मिली धनराशि से वर्ष 2016 में 28 प्राथमिक स्कूल भवनों और एक जूनियर हाइस्कूल भवन की मरम्मत की गई, जबकि क्षतिग्रस्त होने वाले भवनों की संख्या इससे दोगुना है। इस बार सरकार ने 21 नए भवनों के निर्माण की मंजूरी दी है, लेकिन धन आने का इंतजार है। जब तक धनराशि नहीं मिलेगी, तब तक काम शुरू नहीं हो पाएगा।
जगतड़ और बौगाड़ के भवन बैठने लायक नहीं
बेड़ीनाग विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय बौगाड़ के भवन की छत पांच महीने पहले तूफान से उड़ गई थी, अब तक भवन की छत की मरम्मत नहीं हो पाई है। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय जगतड़ का भवन बारिश से ध्वस्त हो जाने के कारण बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में बैठना पड़ रहा है। इस तरह की हालत में कई विद्यालय भवन पहुंचे हुए हैं।
जिला योजना में मात्र 50 लाख का प्रावधान
जिला योजना में बेसिक शिक्षा विभाग के हिस्से में मात्र 50 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है, लेकिन यह धनराशि भी अब तक मिल पाई है। इतनी कम राशि से स्कूल भवनों की मरम्मत कैसे होगी, खुद विभाग के अधिकारी असमंजस में हैं।