राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान में पानी के लिए छात्र-छात्राओं का इंतजार अभी खत्म नहीं होगा। यहां प्रस्तावित नलकूप के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं होने से यह योजना लटक गई है। करीब तीन सौ (एलपीएम) पानी के सापेक्ष बमुश्किल 15 प्रतिशत पानी ही निकलने से जल संस्थान ने नलकूप निर्माण में अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। जल संस्थान नलकूप के लिए मिले 15 लाख रुपये पॉलीटेक्निक संस्थान को वापस करेगा।
पॉलीटेक्निकमें पेयजल किल्लत के चलते जून 2017 में यहां चल रहे दो हॉस्टलों का संचालन बंद कर दिया गया था। पेयजल किल्लत के चलते नए बने तीसरे छात्रावास को शुरू ही नहीं किया जा सका है। अगस्त 2016 में शंखपाल गधेरे से यहां के लिए बनी पेयजल योजना भारी वर्षा से मलबे से पट गई थी।
पॉलीटेक्निक कालेज द्वारा जैसे-तैसे कामचलाऊ व्यवस्था के तहत लाइन को चालू किया गया था। पिछले करीब छह महीने से योजना से एक बूंद पानी नहीं टपक रही है। छात्र-छात्राओं और कर्मियों की पूरी निर्भरता परिसर में लगे अकेले हैंडपंप पर टिकी हुई है। हैंडपंप से लाल पानी निकलने के कारण इसका उपयोग नहाने, कपड़े धोने आदि के लिए किया जा रहा है।
प्राचार्या रचना सिंह का कहना है कि पेयजल किल्लत से सभी तीनों छात्रावासों का संचालन ठप पड़ा है। साथ ही आवासीय कालोनी में रहने वाले कर्मियों को भी दूरदराज से पानी ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है। नलकूप लगाने के लिए जल संस्थान को धन भी आवंटित किया गया था, मगर कोई प्रगति नहीं हो सकी। जल संस्थान का कहना है कि प्रस्तावित नलकूप के लिए चयनित स्रोत में पर्याप्त पानी नहीं है।
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किराए में रह रहे हैं छात्र-छात्राएं
पॉलीटेक्निक में बने दो छात्रावासों में 2016 में 60 छात्र व 30 छात्राएं रहती थीं। पेयजल की गंभीर समस्या के चलते जून 2017 में छात्रावास का संचालन बंद कर दिया गया, जबकि 50 छात्राओं के लिए बना तीसरा छात्रावास पानी की कमी से शुरू ही नहीं हो सका। छात्रावास में छात्र-छात्राओं को रहने का 400 रुपये शुल्क देना पड़ता था, लेकिन कमरा किराए में लेने से उन्हें 1500 से दो हजार रुपये देना पड़ रहा है।
कोट
राजकीय पॉलीटेक्निक में नलकूप के लिए पानी की उपलब्धता को जांचने के लिए चंडीगढ़ से आई टीम द्वारा किए गए सर्वे में चयनित स्थल में मात्र 40 से 50 एलपीएम पानी ही उपलब्ध होने की पुष्टि हुई। पानी नाकाफी होने के चलते जल संस्थान नलकूप निर्माण के लिए मिली राशि को पॉलीटेक्निक को वापस करेगा।
-अशोक कुमार, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, चंपावत।