भूस्खलन से क्षतिग्रस्त खोतिला गांव जाने वाला रास्ता
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खोतिला गांव में चार अक्तूबर 2016 को हुए भूस्खलन के दौरान टूटे रास्ते की मरम्मत अब तक नहीं हो पाई है। गांव के लोग इसी टूटे रास्ते से होकर आवाजाही कर रहे हैं। रास्ते में पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है। यदि किसी का पांव फिसला तो सीधे महाकाली में गिरने का डर रहता है। पिछले साल जब खोतिला में भूस्खलन हुआ, उसके तुरंत बाद प्रदेश के लोनिवि सचिव अरविंद ह्यांकी ने यहां का दौरा किया था और लोनिवि के स्थानीय अधिकारियों को आदेश दिए थे कि गांव जाने के लिए वैकल्पिक रास्ते का निर्माण किया जाए। अब तक न तो रास्ता ही बना है और न मलबा ही हटाया गया है।
खोतिला गांव धारचूला बाजार से मात्र 1.5 किलोमीटर की दूरी पर है। गांव के लोग पैदल रास्ते से आवागमन करते हैं। भूस्खलन से 300 मीटर रास्ता टूट गया है। खोतिला युवा संगठन के अध्यक्ष कृष्ण सिंह नपलच्याल और हयात सिंह नबियाल ने कहा कि लोनिवि के अधिकारी अपने सचिव का आदेश तक मानने को तैयार नहीं हैं। गांव के लोगों ने रास्ते की दशा सुधारने की मांग को लेकर कई बार आंदोलन भी किया, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे। गांव के लोगों ने एसडीएम आरके पांडे को पत्र लिखकर कहा कि यदि रास्ता जल्दी नहीं सुधरा तो आंदोलन किया जाएगा। एसडीएम ने लोनिवि को आदेश दिया है कि खोतिला तक नए रास्ते का निर्माण किया जाए।
नदी में गिरे मलबे को हटाने के लिए राशि मंजूर
सरकार अजीब और अदूरदर्शी फैसले लेती है। खोतिला गांव के पास हुए भूस्खलन के बाद महाकाली में गिरे मलबे को हटाने के लिए 45 लाख रुपये की राशि मंजूर कर दी गई। यह धनराशि सिंचाई विभाग को दी गई है। नदी में गिरा मलबा नदी का जलस्तर बढ़ते ही खुद बहने लगा है और अब तक नदी से मलबा हटाने का कोई काम नहीं हुआ। खोतिला युवा संगठन के अध्यक्ष कृष्ण सिंह नपलच्याल ने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए।