डीडीहाट नगर का दूरस्थ गराली गांव
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डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र के दूरस्थ गराली गांव के लोग 1997 में चुनाव का बहिष्कार कर चुके थे। तब गांव से मतपेटी को खाली भेज दिया गया, लेकिन इसे गांव के लोगों की विडंबना ही कहा जाएगा कि 20 साल बाद भी गांव की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। लोग गांव तक एक अदद सड़क की मांग कर रहे हैं। इस बार गांव के लोगों ने मतदान के बहिष्कार का ऐलान तो नहीं किया, लेकिन उनमें चुनाव को लेकर किसी प्रकार की रुचि नहीं है। गांव के लोगों ने कहा कि इस बार भी वोट देकर उनको ठगा ही जाएगा। इस बीच गराली गांव में मतदान कराने के लिए मंगलवार को पोलिंग पार्टी पहुंच चुकी है।
गराली गांव के साथ एक विसंगति यह जुड़ी है कि उनका विकासखंड मुख्यालय तो डीडीहाट में है और तहसील मुख्यालय बंगापानी बनाया गया है। बंगापानी तहसील के गठन के बाद जब गांवों को उसमें शामिल करने के लिए सीमांकन हुआ तो किसी ने भी इस बात पर गौर नहीं किया कि ब्लॉक के काम के लिए पांच किलोमीटर और तहसील के काम के लिए लोगों को 42 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा। बंगापानी में 2014 में तहसील खुली और उसी समय गराली गांव के लोगों को प्रशासनिक दुविधा में फंसा दिया गया। गांव के लोग 20 साल से सड़क, पानी और अस्पताल की मांग कर रहे हैं। इन मांगों पर तो गौर नहीं हुआ, उल्टा गांव को बंगापानी तहसील में शामिल कर नई मुसीबत पैदा कर दी है।
गराली के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य दान सिंह कन्याल का कहना है कि गराली के लोग यूपी के समय 1997 में मूलभूत सुविधाओं की मांग खासकर गांव को सड़क से जोड़ने की मांग को लेकर विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर चुके हैं। इस बार चुनाव बहिष्कार तो नहीं करेंगे, लेकिन किसी को भी मतदान के लिए प्रेरित नहीं किया जाएगा। 75 परिवारों वाले इस गांव में वोटरों की संख्या 382 हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गांव में नेता मात्र चुनाव के समय ही नजर आते हैं। उसके बाद भी कोई भी गांव के लोगों की सुध नहीं लेता।