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Pithoragarh News: तीन जिलों में महक रही नूरजहां गुलाब की खुशबू

Sun, 09 Apr 2023 11:10 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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 ताकुला में गुलाब के फूलों को एकत्र करतीं महिलाएं। संवाद
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पिथौरागढ़। पहाड़ के किसानों का रुझान अब परंपरागत के साथ ही गुलाब की खेती की ओर बढ़ रहा है। इससे जहां वन्य जीवों से फसलों की रक्षा हो रही है वहीं गुलाब का उत्पादन पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभकारी भी हो रहा है। कुमाऊं के अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में 300 से अधिक किसान गुलाब की खेती से जुड़े हैं।


सगंध पौधा केंद्र (कैप) सेलाकुई देहरादून की ओर से कुछ वर्षों पूर्व पहाड़ के किसानों को गुलाब की खेती से जोड़ने का कार्य शुरू किया गया। शुरूआत में तो यहां किसानों ने कम रुचि दिखाया लेकिन वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों में डेमस्क गुलाब की नूरजहां प्रजाति का खूब उत्पादन हो रहा है। इससे काश्तकारों की आर्थिकी में भी इजाफा हो रहा है। कैंप के जिला प्रभारी विजय प्रसाद वमोला ने बताया कि किसान वर्तमान में नूरजहां प्रजाति के गुलाब की खेती कर रहे हैं। इसमें गुलाब के पौधों को घेरबाड़ के रूप में या पूरे खेतों में लगाया जा रहा है। गुलाब की घेरबाड़ होने से वन्य जीवों से अन्य फसलों की रक्षा भी हो रही है। पिथौरागढ़ में धारचूला के नारायण आश्रम में 100 किसान कलस्टर के रूप में खेती कर रहे हैं।
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कनालीछीना के पसमा और विण ब्लॉक के रावल गांव में 20 किसानों को गुलाब की खेती से जोड़ा गया है। तीनों जगहों पर 9.5 हेक्टेयर में खेेती हो रही है। अल्मोड़ा जिले के ताकुला में 150 किसान 10 हेक्टेयर में गुलाब का उत्पादन कर रहे हैं। बागेश्वर जिले के कपकोट में 50 लोग जुड़े हैं। अगले साल से गरुड़ में भी गुलाब की खेती होगी। किसानों को तकनीकी सहयोग, पौध की व्यवस्था और आसवन संयंत्र के साथ ही बाजार की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। स्वरोजगार को बढ़़ावा देने के उद्देश्य से गुलाब की खेती को मनरेगा से जोड़ा गया है।

बिषाड़ और भैंसोड़ी में सेटेलाइट सेंटर होंगे विकसित
पिथौरागढ़। कैप के जिला प्रभारी विजय प्रसाद वमोला ने बताया कि पिथौरागढ़ के बिषाड़ और बागेश्वर के भैंसोड़ी ताकुला में सेटेलाइट सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। इससे किसानों को उच्च गुणवत्ता की पौध और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध होगी। किसानों को पौधों की कलम तैयार कर नर्सरी बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही गुलाब की खेती में महिला स्वयं सहायता समूहों को वरीयता दी जा रही है।
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फूलों से बनता है गुलकंद
पिथौरागढ़। गुलाब के फूलों से गुलाब जल, गुलकंद और तेल निकाला जाता है। साथ ही सूखी पंखुड़ियों से हर्बल टी, फेसपैक सहित अन्य सौंदर्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। सूखी पंखुड़ियां 1500 से 1800 रुपये किलो तक आसानी से बिक जाती हैं।
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