पंचायत चुनाव पर रोक लगने पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते यूकेडी कार्यकर्ता। संवाद
पिथौरागढ़। पंचायत चुनाव पर रोक लगने से यूकेडी में सरकार के खिलाफ आक्रोश है। यूकेडी कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कहा कि आरक्षण का निर्धारण सही तरीके से न कर सरकार ने पंचायत चुनाव टालने की चालाकी की है। पंचायत चुनाव न होना सिर्फ सरकार की नाकामी है इसका नतीजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ा है।
यूकेडी के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया। ऐरी ने कहा कि सरकार ने बड़ी चालाकी से प्रदेश में पंचायत चुनाव को रोका है। आरक्षण का निर्धारण गलत तरीके से कर चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गई। इसके खिलाफ लोग न्यायालय गए तो चुनाव पर रोक लगा दी गई। यह साफ है कि सरकार खुद चुनाव नहीं कराना चाहती, तभी न्यायालय में सरकार ने अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि चुनाव लड़ने के इच्छुक दावेदारों ने अधिसूचना जारी होते ही प्रचार सामग्री में धन खर्च किया है। अब चुनाव पर रोक लगने से दावेदारों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। सरकार अपनी जनविरोधी नीतियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए चाल चल रही है, जो सफल नहीं होगी। प्रदर्शन करने वालों में रविंद्र पाल, जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर पुनेड़ा, राम सिंह, चंद्रप्रकाश कोहली, मदन मोहन पोखरिया, गिरीश जोशी आदि कार्यकर्ता शामिल रहे।
सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाना सरकार की मंशा
पंचायत चुनाव में रोक लगने पर कांग्रेस ने भी आक्रोश जताते हुए सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश पंत ने कहा कि भाजपा सरकार ने आरक्षण रोस्टर को शून्य कर नये सिरे से आरक्षण लागू किया है। साफ है कि सरकार की मंशा सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने की है। सरकार ने आपत्तियों का निस्तारण किए बगैर आरक्षण सूची जारी कर दी जबकि कई जिलों में अभी मतदाता सूची भी उपलब्ध नहीं है। कांग्रेस की मांग की है कि प्रत्येक मतदाता को मतदान का अधिकार मिले और आरक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी हो। जिला पंचायत अध्यक्ष व प्रमुखों के आरक्षण की घोषणा नामांकन से पहले हो।