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जिले के अंतिम नामिक गांव में अब तक नहीं हो पाया एक भी व्यक्ति का टीकाकरण

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पिथौरागढ़। जिले के अंतिम गांव नामिक गांव में आशा और दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अलावा किसी का टीकाकरण नहीं हो सका है।
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नामिक गांव को जोड़ने वाला पैदल रास्ता रामगंगा नदी में समा चुका है। गांव को जोड़ने वाला पुल भी खतरे की जद में आ गया है। जिले का अंतिम गांव नामिक अति दुर्गम क्षेत्र में है। यहां 114 परिवारों में 775 लोग रहते हैं।
इनमें से पांच महिलाओं और 17 पुरुषों समेत कुल 22 लोग चलने में असमर्थ हैं। गांव में कोरोना की दो लहरों के बाद भी मात्र तीन लोगों का ही टीकाकरण होना चिंता का विषय है।
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जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समक्ष बरसात में नामिक गांव में टीकाकरण करने की चुनौती है। 19 जून को आई आपदा में रामगंगा नदी पर बना 80 मीटर पैदल रास्ता बह गया है।
इस कारण तहसील मुख्यालय से गांव का संपर्क कट गया है। रामगंगा नदी पर बने झूलापुल के एबटमेंट बहने के कारण कारण पुल खतरे की जद में आ गया है।
ग्राम प्रधान तुलसी देवी का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर में गांव में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का ही टीकाकरण हो पाया है। गांव सेेे तहसील मुख्यालय से काफी दूर है।
इस कारण लोग टीकाकरण के लिए लोग केंद्रों में नहीं पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि टीकाकरण न होने से गांव में कोरोना संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा है। उन्होंने शीघ्र टीकाकरण के लिए गांव में शिविर लगाने की मांग की है।
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नामिक गांव के लिए जल्द ही टीकाकरण के लिए टीम को भेजा जाएगा। इसके लिए सीएमओ को निर्देश दे दिए गए हैं। लोनिवि को गांव के क्षतिग्रस्त पैदल रास्ते को ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।
- आनंद स्वरूप, डीएम, पिथौरागढ़।
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