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थल तहसील का जनता को कोई फायदा नहीं

Fri, 09 Dec 2016 10:57 PM IST
महेंद्र जंगपांगी/अमर उजाला, थल
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सूचना विभाग के भवन में चल रहा तहसील कार्यालय - फोटो : अमर उजाला
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13 जुलाई 2015 को अस्तित्व में आई थल तहसील से अब तक लोगों को कोई फायदा नहीं मिला है। इस तहसील में रिटायर होने के बाद संविदा पर रखे गए तहसीलदार के पास कोई वित्तीय अधिकार नहीं हैं। इस कारण तहसील में रजिस्ट्री, बैनामा, दाखिल-खारिज जैसे काम नहीं हो पा रहे हैं। तहसील कार्यालय को इसके खुलने के दिन ही सूचना विभाग के खाली पड़े भवन में संचालित कर दिया गया। तब से तहसील उसी भवन में चल तो रही है, लेकिन लोगों का कोई काम तहसील से नहीं होता। थल तहसील में नौ पटवारी क्षेत्रों के 113 ग्राम पंचायतों के 600 गांवों को शामिल किया गया। तहसील खुलते समय लोगों में जिस तरह का उल्लास दिखा था वह समय के साथ ही धूमिल हो चुका है।
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जुलाई में देवलथल तहसील से रिटायर होने के बाद तहसीलदार गिरीश चंद्र भट्ट को संविदा में फिर से नियुक्ति दी गई और उनको थल तहसील का कार्यभार सौंप दिया गया। उनको खुद तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। तहसील में कोई वाहन नहीं है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सात पद सृजित हैं, लेकिन इनमें एक भी कर्मचारी तैनात नहीं है। नायब तहसीलदार, नाजिर, लेखाकार का पद रिक्त चल रहा है। इतनी बड़ी तहसील का काम चलाने के लिए एक रजिस्ट्रार कानूनगो और दो क्लर्क रखे गए हैं। तहसील कार्यालय में फर्नीचर नहीं है। उसी पुराने फर्नीचर से कर्मचारी काम चला रहे हैं। तहसील कार्यालय होने के कारण लोग रोज काम के लिए यहां पहुंचते तो हैं, लेकिन उनके अधिकांश काम यहां से नहीं हो पाते। 

तहसील खोलने का औचित्य क्या था
समाजसेवी देवराज सत्याल का कहना है कि जब सरकार तहसील कार्यालयों में ढांचागत सुविधाएं नहीं जुटा पाती तो इनको खोलने का औचित्य क्या है। वह कहते हैं कि इससे तो पुरानी तहसीलों को ज्यादा सुविधा संपन्न बनाया जाता। सिर्फ राजनैतिक कारणों से तहसील खोलकर लोगों के साथ खिलवाड़ करना ठीक नहीं है। वह कहते हैं कि थल तहसील से कोई काम नहीं हो रहा है। 
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सरकार तत्काल व्यवस्था को ठीक करे
पूर्व प्रधान सुरेंद्र पांगती का कहना है कि यदि तहसीलों को सही ढंग से संचालित करना है तो तत्काल व्यवस्था सुधारी जाए। वह कहते हैं कि सिर्फ लोगों को संतुष्ट करने के लिए तहसीलों को खोलना ठीक नहीं है। सरकार यह तय करे कि वह तहसीलों के लिए संसाधन जुटा पाएगी या नहीं। जब सुविधा ही नहीं है तो इनका कोई मतलब भी नहीं रह जाता।

छह पट्टियों में पटवारी नहीं
थल तहसील के अंतर्गत आने वाली नौ पट्टियों में से छह में पटवारी नहीं हैं। उपराड़ापाठक, थल, भटीगांव, आमथल, सिल्दौ और कोटगाड़ी पट्टियां बिना पटवारी के चल रही हैं। इस तहसील में कार्यरत एकमात्र कानूनगो का पिछले दिनों तेजम ट्रांसफर कर दिया गया। अब इस तहसील में कोई कानूनगो नहीं है।
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