पुलहिंडोला में निर्माणाधीन मिनी ट्यूबवेल लगाने को लेकर पिछले माह हुए आंदोलन के बावजूद इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हो सकी है। 21 से 29 जनवरी तक चले आंदोलन को खत्म करते वक्त दस दिनों के भीतर पंप लगाने का प्रशासन द्वारा दिया गया आश्वासन फिलहाल तो हवाई साबित हुआ है। वहीं, ग्रामीण इस वादाखिलाफी से नाराज है।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष आन सिंह भंडारी और नकुल पंत का कहना है कि जल निगम के अधिशासी अभियंता से फोन पर वार्ता करने के बाद तहसीलदार नीलू चावला ने 10 दिनों में मिनी ट्यूबवेल में पंप लगाने का आश्वासन देते हुए पेयजल योजना संघर्ष समिति का आंदोलन खत्म करवाया था, मगर इस आश्वासन के लिए दी गई समय सीमा का दोगुना वक्त बीतने के बावजूद पंप लगाने की दिशा में एक कदम नहीं बढ़ा जा सका है।
बता दें कि 2014 में क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या के चलते 1.27 करोड़ रुपये लागत से मिनी ट्यूबवेल स्वीकृत किया गया था। निर्माण कार्य की सुस्त गति और समय से धन अवमुक्त न होने के कारण चार साल बाद भी ट्यूबवेल निर्माण का कार्य अधर में लटका है। पुलहिंडोला क्षेत्र में एक भी पेयजल योजना नहीं है, ग्रामीणों की पूरी निर्भरता यहां लगे छह हैंडपंपों पर टिकी है। इसमें तीन हैंडपंप सूख चुके हैं। शेष तीन हैंडपंपों पर पूरे क्षेत्र का दबाव है। मिनी ट्यूबवेल का निर्माण कार्य अधर में लटकने से पुलहिंडोला की करीब एक हजार की आबादी हैंडपंपों और 800 मीटर दूर चरनौला गधेरे, पुल्ला गधेेरे से पानी ढोने को मजबूर हो रही है।
निराश हाथ लगी
ईश्वरी देवी का कहना है कि क्षेत्र में मिनी ट्यूबवेल लगने की सूचना मिलने पर ग्रामीणों खासकर महिलाओं में काफी खुशी थी, कि उन्हें दिनभर हैंडपंपों में लाइन में नहीं लगना पड़ेगा। गाड़-गधेरों से भी पानी ढोने से निजात मिल जाएगी, मगर अब वे निराश हैं।
गर्मियों में बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ता है
सुशीला जोशी का कहना है कि पुलहिंडोला क्षेत्र में सबसे अधिक दिक्कत पानी की है। मिनी ट्यूबवेल का कार्य पूरा न होने से लोगों को पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। गर्मियों में तो लोगों को बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ता है। ट्यूबवेल चालू होने से ग्रामीणों को काफी राहत मिलती।
मिनी ट्यूबवेल के निर्माण कार्य में सिविल वर्क पूरा कर लिया गया है। इसमें पेयजल लाइनें बिछाने, टैंक निर्माण आदि कार्य पूरा कर लिया गया है। मिनी ट्यूबवेल के लिए स्वीकृत 1.27 करोड़ रुपये के सापेक्ष 67 लाख अवमुक्त हुए हैं। धनाभाव के कारण पंप सैट लगाने में देरी हो रही है। दो दिनों में पंप सैट पहुंचने की उम्मींद है, जिसे लगा दिया जाएगा।
- एचसी भारती, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
पंप लगाने के लिए अभियंताओं की टीम पहुंच गई है। मजदूरों की व्यवस्था होने पर अगले दो दिनों में काम शुरू हो जाएगा।
- नीलू चावला, तहसीलदार, लोहाघाट।