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केवट बनकर ग्रामीणों को नदी पार करा रहे सैनिक लक्ष्मण सिंह

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ग्रामीणों को कंधे में रखकर रामगंगा नदी पार कराते सैनिक लक्ष्मण सिंह। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। बेड़ीनाग विकासखंड के रुनाथल और मल्ली गंगोरा क्षेत्र की 1500 की आबादी के लिए रामगंगा नदी पर पुल की सुविधा तक नहीं है। क्षेत्रवासी तैरकर नदी पार करते हैं। इन दिनों छुट्टी पर घर आया एक सैनिक ग्रामीणों को कंधे पर बैठाकर नदी पार करा रहा है।
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बेड़ीनाग की ग्राम पंचायत रुनाथल, सेरा गंगोरा, काफलखोरी, मल्ली गंगोरा, बेलखेत, डांसीखेत, बरमतड़ी, मुठलीगाड़ रामगंगा नदी के किनारे बसे हैं। यह गांव मुवानी कस्बे के ठीक सामने स्थित हैं। लगभग डेढ़ हजार की आबादी के लिए रामगंगा नदी पर पुल नहीं बना है। ग्रामीणों को पुल से आवाजाही करने के लिए छह किमी की पैदल दूरी तय कर चोपड़ा जाना पड़ता है। इसमें आने-जाने में तीन घंटे से अधिक का समय लग जाता है। ऐसे में गांव के लोग नदी से ही आवाजाही करना पसंद करते हैं, लेकिन बरसात में यह संभव नहीं हो पाता है। शीतकाल में भी ठंडे पानी में आवाजाही करना आसान नहीं होता। इन दिनों छुट्टी पर घर आए सैनिक लक्ष्मण सिंह ग्रामीणों को नदी पार करा रहे हैं। इन गांवों के बच्चे भी पढ़ने के लिए मुवानी आते हैं। राशन और अन्य जरूरी सामान के लिए भी ग्रामीणों को मुवानी या थल जाना पड़ता है। जान जोखिम में डालकर आवाजाही करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गई है।
स्थानीय निवासी पूर्व सैनिक दीवान सिंह का कहना है कि पूर्व में दो महिलाएं और 15 वर्षीय किशोर नदी के तेज बहाव में बह गया था। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाते समय खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। बीमारों को बांस के डंडे पर बैठाकर नदी पार कराई जाती है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार ने कहा कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने पुल निर्माण के लिए कोई पहल नहीं की है।
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