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जलवायु परिवर्तन से गर्मी की शुरुवात में ही सूख गए मुनस्यारी के जल स्रोत

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मुनस्यारी क्षेत्र कम पानी वाला जल स्रोत। - फोटो : PITHORAGARH
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। पर्यटननगरी मुनस्यारी में इस बार बेहद कम बर्फबारी हुई है। इस कारण जल स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाए हैं। इसके चलते अभी से पानी का संकट होने लगा है।
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पिछले वर्ष 18 और 19 जुलाई को आई आपदा के कारण कई लाइनें ध्वस्त हैं। जलस्रोत न सुधारे जाने से ज्यादातर इलाकों में पहले से ही पेयजल संकट है।
क्षेत्र के लोग हर साल बरसात में आपदा से जूझते हैं लेकिन इस साल मुनस्यारी वासियों को मार्च से जून तक गंभीर पेयजल संकट से जूझना पड़ सकता है।
क्षेत्र के मुख्य पेयजल स्रोत वाले स्थान बलाती, खलिया, भुजानी में कई जल स्रोत सूख गए हैं। कुछ स्रोतों में बहुत कम पानी रह गया है।
भेड़पालक गंगा सिंह ने बताया कि वह भेड़, बकरियां चराने के लिए कई वर्षों से जंगलों में प्रवास कर रहे हैं। पाया कि इस साल कम बर्फबारी हुई है। इस कारण पिछले वर्षों की तुलना में जंगलों के बीच बहने वाले नदी, नालों में पानी बेहद कम है।
बर्फबारी न होने और जलवायु परिवर्तन के कारण जलस्रोत सूख रहे हैं। इसका बुरा असर पेड़-पौधों पर भी पड़ा है। इसी कारण इस बार क्षेत्र में फरवरी में ही बुरांश खिल गया। हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक होने की जरूरत है।
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- बृजेश धर्मशक्तू, पर्यावरणविद।
लगभग सभी इलाकों में पेयजल आपूर्ति सुचारु है। हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में स्रोतों में पानी बेहद कम हो गया है। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
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- गजेंद्र मनोला, जेई, जल संस्थान।
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