पिथौरागढ़। कोरोना काल में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। सीमांत जिले के अस्पताल स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। इसके बाद भी इनको ठीक करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
सीमांत जिले में चिकित्सकों के 187 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 99 नियमित चिकित्सक, 18 दंत चिकित्सक, पांच संविदा और 19 बांडधारी संविदा चिकित्सक ही तैनात हैं।
सीमांत जिले में रेडियोलॉजिस्ट, हृदय, चर्मरोग सहित कई चिकित्सकों के पद खाली हैं। अस्पतालों में फार्मासिस्ट के 72 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 20 फार्मासिस्टों के पद खाने हैं।
स्वास्थ्य उप केंद्रों में फार्मासिस्ट के 73 पद स्वीकृत हैं। 16 पद खाली हैं। उपचारिका के 56 पद स्वीकृत हैं, 41 उपचारिका ही कार्यरत हैं और 15 खाली हैं। लैब तकनीशियन के 20 स्वीकृत पदों के सापेक्ष जिले में 17 तकनीशियनों के पद खाली हैं।
एक्स-रे तकनीशियन के स्वीकृत आठ पदों के सापेक्ष दो ही कार्यरत हैं। छह पद खाली हैं। एएनएम के 193 पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष 139 एएनएम ही कार्यरत और 54 पद खाली हैं।
वार्डब्वॉय के 66 पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष 37 कार्यरत और 29 पद खाली हैं। वार्ड आया के 10 पदों के सापेक्ष पांच पर कार्यरत और पांच रिक्त हैं।
स्वच्छक के स्वीकृत 75 पदों के सापेक्ष 40 पद भरे और 35 पद खाली हैं। कोरोना काल में चिकित्सकों और संसाधनों की कमी लोगों पर भारी पड़ सकती है।
बेस अस्पताल से मिलेगी राहत
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय के लिंठ्यूड़ा में बेस अस्पताल के बनने से लोगों को राहत तो मिली है लेकिन यहां पर भी व्यवस्थाओं की भारी कमी है। सीटी स्कैन मशीन यहां लग चुकी है। तकनीशियन का इंतजार है।
ऑक्सीजन प्लांट भवन बनकर तैयार है लेकिन ऑक्सीजन मशीन और तकनीशियन की जरूरत है। सीमांत जिले का पहला फर्स्ट रेफर सेंटर होने के बाद भी सुविधाओं की कमी है।
आठ डॉक्टरों के स्थान पर दो बीडीएमएस और दो बांडधारी डॉक्टर तैनात हैं। कोरोना के कारण लोगों का एक्स-रे कुछ समय पूर्व ही शुरू हुआ है। कुछ दिन पूर्व ही पांच डॉक्टरों का दूसरे जिले में तबादला कर दिया गया।
रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। खाली पदों की जानकारी शासन को हर माह भेजी जा रही है।
- डॉ. एचसी पंत, सीएमओ पिथौरागढ़।