ओगला कस्बे में दुर्दशा का शिकार सुलभ शौचालय।
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ओगला स्टेशन में करीब दस साल पूर्व सुलभ इंटरनेशनल कंपनी ने जो शौचालय बनाया था वह जर्जर हालत में पहुंच गया है। शौचालय तक जाने वाला रास्ता टूट गया है। ओगला स्टेशन में दिन भर में सैकड़ों वाहन और यात्री पहुंचते हैं लेकिन शौचालय के अभाव में उनको खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
ओगला स्टेशन से रोजाना धारचूला, मुनस्यारी, डीडीहाट, भागीचौरा, जौलजीबी, पिथौरागढ़, कनालीछीना, टनकपुर, दिल्ली के लिए वाहन चलते हैं। अक्सर हर वाहन ओगला स्टेशन में रुकता है और यात्री चाय, नाश्ता, दोपहर भोजन इसी स्थान पर करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ओगला में शौचालय बनाने की मांग कई बार की जा चुकी है। क्योंकि पहले से बनाया गया शौचालय अब किसी काम का नहीं रह गया है लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत भी स्वजल परियोजना या प्रशासन ने ओगला में शौचालय बनाने का कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया। कस्बे के व्यापारी प्रकाश अवस्थी का कहना है कि सरकार स्वच्छ भारत अभियान और खुले में शौच से मुक्ति का सिर्फ दावा करती है लेकिन हकीकत यह है कि सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय बने ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि खुले में शौच और मूत्र त्याग करने से कस्बे में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इससे बीमारियां फैलने का खतरा भी है।
इधर, तहसीलदार आईबी मल्ल का कहना है कि ओगला में शौचालय बनाने के लिए स्वजल परियोजना के अधिकारियों से कह दिया गया है। जमीन का चयन कर सुविधाजनक स्थान पर शौचालय बनाया जाएगा ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि ओगला में अनिवार्य रूप से शौचालय बनाया जाना चाहिए।