पिथौरागढ़। सीमांत जिले के मोस्टमानू में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के लिए शायद सरकार की तिजोरी में धन नहीं है। इसी सत्र से मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू करने दावों के बीच निर्माण के लिए सिर्फ 60 फीसदी धन ही कार्यदायी संस्था को मिला है। धन के अभाव में अब तक मोस्टमानू में बन रहे कैंपस का 90 तो इसके अधीन बेस अस्पताल का निर्माण कार्य 60 फीसदी पूरा हो सका है। धन न मिलने से इसका निर्माण अटक सकता है। इससे इसी सत्र से इसके संचालन के दावों पर ग्रहण लगने की आशंका है।
हैरानी की बात है कि 768 करोड़ रुपये से बनने वाले मेडिकल कॉलेज के लिए अब तक सिर्फ 460 करोड़ रुपये मिले हैं। धन के अभाव में काम की रफ्तार धीमी पड़ गई है। ऐसे में देशभर के मेडिकल कॉलेजों में सितंबर में मेडिकल की पढ़ाई शुरू होने तक इसका निर्माण कार्य पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
यदि समय पर निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो क्या इस साल मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू हो पाएगा, यह सवाल चर्चाओं में है। कार्यदायी संस्था के मुताबिक धन की कमी से मेडिकल कॉलेज के कैंपस का 90 तो इसके लिए जरूरी अस्पताल का 60 फीसदी काम ही पूरा हो सका है। कार्यदायी संस्था के मुताबिक, समय पर निर्माण कार्य पूरा करने का खासा दबाव है।
निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो कैसे मिलेगी एमसीआई की अनुमति
नियमों के मुताबिक, किसी भी मेडिकल कॉलेज का संचालन करने के लिए एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) की अनुमति जरूरी है। कॉलेज में विद्यार्थियों के रहने, मरीजों के इलाज के लिए जरूरी संसाधन, फैकल्टी आदि व्यवस्थाएं परखने के बाद भी एमसीआई की अनुमति मिलती है। सितंबर से पहले एमसीआई की टीम मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाएं परखेगी लेकिन अब तक न तो निर्माण कार्य पूरा हो सका है और ना ही जरूरी संसाधन और फैकल्टी की व्यवस्था की जा सकी है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज को एमसीआई की अनुमति कैसे मिलेगी यह सवाल चर्चाओं में है।
कोट
मेडिकल कॉलेज के लिए अब तक 460 करोड़ रुपये मिले हैं। धन की कमी से काम प्रभावित हो रहा है। तय समय पर काम पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। - अभिषेक स्नेही, जेई, पेयजल निर्माण निगम, पिथौरागढ़
फोटो-07 पीटीएच 08 पी-पिथौरागढ़ के मोस्टमानू में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज। संवाद