धारचूला में लोगों को होमस्टे योजना की जानकारी देते केएमवीएन के एमडी
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दारमा, व्यांस, चौदांस घाटी के लोग अब होम स्टे योजना के प्रति आकर्षित होने लगे हैं। इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम ने यहां बाकायदा कुकिंग ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया। कैंप के उद्घाटन पर केएमवीएन के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने कहा कि अब फाइव स्टार का नहीं, होम स्टे का दौर शुरू हो रहा है। पर्यटक पहाड़, जंगल, नदियों की सैर पसंद कर रहे हैं। वह दूरदराज क्षेत्र के लोगों की जीवनशैली, खानपान, रीति-रिवाज पर ज्यादा जिज्ञासा रखने लगे हैं। उन्होंने दावे के साथ कहा कि इस वर्ष सीमांत के लोग होम स्टे के जरिए रोजगार हासिल करेंगे।
एमडी ने कहा कि निगम होम स्टे योजना को बढ़ावा दे रहा है। यदि किसी व्यक्ति के पास अपने रहने के अलावा दो-चार कमरों का मकान है तो वह उसे पर्यटकों के रहने के लिए दे सकता है। वहां पर पर्यटकों को आवास और भोजन की सुविधा दी जाए। मुनस्यारी में कई लोगों ने होम स्टे योजना को अपनाया है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को सही भोजन देने, उनका स्वागत करने के लिए ही यह प्रशिक्षण कैंप आयोजित किया गया है।
केएमवीएन के वरिष्ठ प्रबंधक डीके शर्मा ने बताया कि इस बार दारमा, व्यांस एवं चौदांस घाटी के लोग होम स्टे के माध्यम से रोजगार से जुड़ सकेंगे। इस मौके पर पर्यटनविद् अशोक पांडे, होम स्टे विशेषज्ञ कैप्टन सौरभ चौहान, सैफ हरीश मेहता, श्रीराम के द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में 115 लोग शामिल हुए।
छोटा कैलाश के लिए 370 लोगों का पंजीकरण
केएमवीएन के एमडी धीराज गर्ब्याल ने बताया कि विगत वर्ष 212 लोगों ने छोटा कैलाश के दर्शन किए थे, लेकिन इस बार केएमवीएन के व्यापक प्रचार-प्रसार के कारण अब तक 370 लोगों ने आदि कैलाश के लिए पंजीकरण करा लिया है, जो अभी और बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि इस बार छोटा कैलाश यात्री वापसी में गुंजी के बजाय नाबी गांव में रात्रि विश्राम करेंगे। इससे गुंजी पड़ाव पर पड़ने वाले लोड को कम किया जा सकेगा। नाबी गांव भी यात्रा से जुड़ जाएगा। नाबी गांव को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा।
पहला यात्री दल 13 जून को पहुंचेगा
केएमवीएन के एमडी धीराज गर्ब्याल ने बताया कि वर्ष 2017 की कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 18 दलों का पंजीकरण हो रहा है तथा प्रत्येक दल में अधिकतम 60 यात्री शामिल होंगे। पहला दल 13 जून की शाम धारचूला पहुंचेगा और 14 जून को धारचूला से हरी झंडी दिखाकर अगले पड़ाव के लिए रवाना किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कई भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद कैलास यात्री इसी पौराणिक यात्रा रूट को ही प्राथमिकता देते रहे हैं।