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मोनाल संस्था ने नागनीधुरा के लिए ढूंढा आसान ट्रैकिंग रूट

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मुनस्यारी के नागनीधुरा का सबसे अधिक ऊंचाई वाला क्षेत्र। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। कुमाऊं के प्रसिद्ध नागनीधुरा के लिए मोनाल संस्था ने एक नया ट्रैकिंग रूट खोजा है। संस्था के अनुसार नया रूट पुराने रास्तों की अपेक्षा बेहद असान है। इस रास्ते के सहारे दो से तीन दिन में पर्यटक नागनीधुरा तक आसानी से पहुंच सकते हैं। मुनस्यारी के गोरीपार क्षेत्र में स्थित ट्रैकिंग रूट बेहद खूबसूरत और रोमांचक है। यहां पहुंचकर बर्फ से ढकी नेपाल क्षेत्र की वादियों को बेहद करीब से देख सकते हैं।
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मोनाल संस्था के छह सदस्यों ने अक्तूबर में क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुनस्यारी से नागनीधुरा तक पदयात्रा की। संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि सिर्फ तीन दिन की पदयात्रा के बाद वह नागनीधुरा पहुंच गए। इसमें पहले दिन चुल्कोट गांव होकर खोली वन पहुंचे, दूसरे दिन नागनीधुरा और तीसरे दिन तीसरे दिन बर्फ से लकदक पंचाचूली और राजरंभा की चोटियों के करीब पहुंच गए।
संस्था के सदस्य सुंदर का कहना है कि इस रूट पर काफी खूबसूरती है। ऊंचे पहाड़, घने जंगल, कैंपिंग के लिए उपयुक्त जगह भी है। यह सारी खूबियां इसकी लोकप्रियता बढ़ाती हैं। संस्था के सुरेंद्र, सुंदर, दान सिंह, दीपक पंवार, मनोज कुमार, आशीष उप्रेती ने इस रास्ते यात्रा की। संस्था इस ट्रैक का डॉक्यूमेंटेशन कर रही है। इसे पर्यटन विभाग को सौंपा जाएगा।
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नेपाल की चोटियों के भी होते हैं दर्शन
पिथौरागढ़। तीन दिन की 35 किलोमीटर की यात्रा के बाद संस्था के सदस्य नेपाल की चोटियों के करीब पहुंच गए। यहां से पंचाचूली, राजरंभा, नेपाल की चोटियों को देखना बेहद रोमांचकारी रहा। यहां से बथनी, बलाती ग्लेशियर, पंचाचूली ग्लेशियर, राजरंभा, मेनका, पंचाचूली द्वितीय की चोटियां एकदम सामने दिखती हैं। संस्था अब इस ट्रैकिंग रूट को पर्यटन मानचित्र पर लाना चाहती है।
और सुगम हो रूट तो बढ़ेंगी पर्यटन की संभावनाएं
पिथौरागढ़। ढीलम निवासी सामाजिक कार्यकर्ता दान सिंह ने बताया कि अगर इस रास्ते को पर्यटकों के लिए और सुगम बनाया जाए, तो पर्यटन की संभावना बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। वह अपनी आजीविका सालभर चला सकेंगे। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि मुनस्यारी के गोरीपार क्षेत्र में पर्यटन बढ़ाने के लिए कोई कार्य नहीं किया गया। अब सरकार इस पर्यटन गतिविधि के माध्यम से क्षेत्रवासियों को रोजगार दे सकती है।
संस्था और ट्रैकिंग रूट खोजने का प्रयास करेगी। पुराने रास्ते मिलम से पर्यटक जाना पसंद नहीं करते हैं। मुनस्यारी में सिर्फ मिलम ग्लेशियर और खालिया टॉप देखने पर्यटक आते हैं। अगर मुनस्यारी के आसपास नए रास्ते खोजे जाएं, तो यह पर्यटन गतिविधियों को लाभ दिला सकता है। इसकी पूरी जानकारी पर्यटन विभाग को सौंपी जाएगी, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में भी यह रास्ता दर्ज हो सके।
- सुरेंद्र पंवार, सचिव, मोनाल
संस्था के खोजे गए ट्रैकिंग रूट की पूरी जानकारी ली जाएगी। इसके बाद विभागीय प्रतिनिधि मुनस्यारी से नागनीधुरा ट्रैकिंग रूट का निरीक्षण करेंगे। ट्रैकिंग रूट की पूरी जानकारी मिलने पर इसे विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे।
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- अमित लोहनी, जिला पर्यटन अधिकारी, पिथौरागढ़।

मुनस्यारी के नागनीधुरा कैंप में कैंपिंग करते मोनाल संस्था के सदस्य।- फोटो : PITHORAGARH

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