पिथौरागढ़। जिले के अधिकतर राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालयों में जरूरी जांचें नहीं होती है। गंभीर बीमारी होने पर मरीजों को सीएचसी या जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। ऐसे में उनकी जेब पर आर्थिक भार पड़ता है और समय की बर्बादी भी होती है।
जिले के विभिन्न ब्लॉकों में मरीजों को इलाज के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह ब्लॉकों के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालयों में जांच की कोई सुविधा नहीं होना है। मूनाकोट के बिनकोट, डीडीहाट चमाली, हचीला पंथयाली, हरड़कटिया, सिंघाली, ख्वांकोट, आणागांव, देवलथल, छड़नदेव, तितरी राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालयों, गंगोलीहाट के एपीएचसी चौरपाल, ग्वासीकोट, एसएडी बनकोट, पोखरी, कंडारीछीना, रामेश्वर, बेड़ीनाग ब्लॉक के भुवनेश्वर, धरमघर, जाबुकाथल राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालयों, धारचूला ब्लॉक के दर, खेत, खेला, गुंजी, जुम्मा राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालयों और मुनस्यारी ब्लॉक के एपीएचसी मदकोट, एलोपैथिक अस्पताल दुम्मर, बोना, क्वीटी, उच्छेती में जांच की कोई सुविधा नहीं है।
एसीएमओ डॉ.मदन बोनाल ने बताया कि खून जांच की सुविधा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में है। संबंधित क्षेत्र के मरीज नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर खून की जांच कराते हैं।
स्वास्थ्य विभाग को राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालयों में सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए। बीमार लोगों को जांच के लिए ब्लॉक में स्थित सीएचसी या फिर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। -हीरा सिंह चिराल, मुनस्यारी।
क्षेत्र में स्थित राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालयों का उच्चीकरण करने की जरूरत है। इन केंद्रों में डॉक्टर भी नहीं होते हैं। समय पर दवा उपलब्ध नहीं हो पाती है। -कमलकांत, देवलथल।