बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित उत्तराखंड में महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने महिला सशक्तीकरण पर जोर दिया। वक्ताओं का कहना था कि शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति बेहतर हुई है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाओं का जीवन बेहद संघर्षपूर्ण है।
संगोष्ठी का शुभारंभ प्रभारी प्राचार्य पीसी मठपाल और प्रोफेसर प्रेमा नेगी ने किया। प्राचार्य सीडी सूंठा की अध्यक्षता में दूसरे दिन शोध छात्र-छात्राओं ने शोध पत्र पेश किए। नैनीताल की शोध छात्रा सरिता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विधवा महिलाओं को काफी संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने ऐसी महिलाओं के लिए दी जाने वाली सरकारी सुविधाओं के बारे में बताया। रश्मि किरण टम्टा का कहना था कि संगोष्ठी से स्पष्ट है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती है।
रुद्रपुर काॅलेज के एसोसिएट प्रोफेसर सर्वजीत यादव का कहना था कि यदि समाज को आगे बढ़ाना है तो महिलाओं की स्थिति को हर हाल में बेहतर कर उन्हें आगे आने के लिए प्रेरित करना होगा। पिथौरागढ़ के शोध छात्र सुनील कालाकोटी ने महिला श्रमिकों पर शोध पत्र पेश करते हुए कहा कि महिलाएं घर का कामकाज निपटा कर ही मजदूरी पर जाती हैं। इन सबके बीच वह अपना उचित ध्यान नहीं रख पाती हैं।
संगीता, साबिया नाज, पूजा जोशी ने भी शोध पत्र पेश किए। आयोजन सचिव डॉ. प्रतिभा नेगी ने नारी शक्ति के विषय पर चर्चा करते हुए संगोष्ठी को प्रासंगिक बताया। संचालन डॉ. लीलाधर मिश्र ने किया। डॉ. पीसी मठपाल और संयोजक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने महाविद्यालय स्टाफ का आभार जताया।