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Pithoragarh News: 1936 में कर्नाटक के संत ने की थी नारायण आश्रम की स्थापना

Tue, 03 Oct 2023 10:41 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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धारचूला के चौदास घाटी में स्थित नारायण आश्रम। संवाद
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पिथौरागढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अक्तूबर में उच्च हिमालयी क्षेत्र का भ्रमण कार्यक्रम संभावित है। वह दो दिनी प्रवास पर एक दिन धारचूला के चौदास घाटी स्थित नारायण आश्रम में रात्रि विश्राम करेंगे। इस आश्रम की स्थापना वर्ष 1936 में कर्नाटक के संत नारायण स्वामी ने की। उन्होंने इस भूमि को हिमालय के इस ओर का कैलाश की संज्ञा दी।
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पूर्व प्रधानाचार्य और लेखक डॉ. ललित पंत ने बताया कि संत नारायण स्वामी वर्ष 1935 में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर आए थे। वापसी में उनके मन में आश्रम बनाने का विचार आया। इसे मूर्त रूप देने में पं. ईश्वरी दत्त पांडे जैसे शिष्य उन्हें मिले। चौदास घाटी के सोसा के ग्रामीणों ने नारायण स्वामी के तेजस्वी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर आश्रम के लिए भूदान करना स्वीकार किया। 26 मार्च 1936 को आश्रम स्थापना का कार्य शुरू हुआ। इसमें एक कुटिया बनाई गई जिसमें स्वामी ध्यान लगाते थे। 1939 में पक्के भवन का निर्माण शुरू हुआ। गंगानगर, बड़ौदा, अहमदाबाद, पूना, मुंबई के नारायण भक्तों ने धन दान दिया। यहां कीर्तन मंदिर बनाया गया।
दस वर्ष के सतत श्रम से वास्तुशिल्प की दृष्टि से दर्शनीय दो मंजिला भवन तैयार हुआ। अगस्त 1946 में यहां भगवान नारायण की मूर्ति स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की गई। यहां अन्नपूर्णा वाचनालय, कुटिया, गोशाला का निर्माण किया गया। अपने लिए स्वामी जी ने पिरामिडिकल शून्यता कुटीर बनाई। आश्रम की स्थापना के बाद क्षेत्र में सनातन संस्कृति को बढ़ावा मिला। सामाजिक पुनरुत्थान और जनकल्याण के लिए आश्रम की गतिविधियां जब सुचारु हो गईं तो स्वामी ने अस्कोट से पश्चिम की ओर चढ़ती पहाड़ी के शीर्ष पर शिक्षा की अलख जगाने के लिए 1948 में स्कूल की नींव रखी। वर्तमान में यह नारायण नगर के नाम से जाना जाता है। नौ नवंबर 1956 को 44 वर्ष की आयु में स्वामी कलकत्ता में ब्रह्मलीन हो गए।
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