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नामिक गांव की समस्या हल करना चुनौती

Sun, 19 Jun 2016 10:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नाचनी
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नामिक से लौटता अधिकारियों का दल - फोटो : अमर उजाला
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करीब 12 किलोमीटर के पैदल खतरनाक रास्ते से नामिक पहुंचकर प्रशासनिक अमले ने वहां के लोगों को फिलहाल जिला मुख्यालय तक मार्च निकालने से रोक तो लिया है, लेकिन जिस लिखित समझौते के आधार पर अधिकारी लोगों को राजी कराने में कामयाब हुए हैं, उसे पूरा करना कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। नामिक के लोगों ने इस समय अधिकारियों की बात मान तो ली है, लेकिन यदि उनके साथ कोई धोखा होता है तो अगली बार वह सीधे दिल्ली का रुख करने वाले हैं।
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नामिक मुख्यमंत्री हरीश रावत के विधानसभा क्षेत्र का सबसे दूरस्थ गांव है। 120 परिवारों वाले इस गांव की आबादी 800 के करीब है। अब तक सड़क, संचार, चिकित्सा जैसी सुविधाओं से वंचित नामिक के लोगों की विपदा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक गांव के लोग किसी भी सरकारी सुविधा को हासिल नहीं कर पाए हैं। गांव के सरपंच केदार सिंह, पोस्टमास्टर महेंद्र सिंह का कहना है कि ऐसे आश्वासन प्रशासन की ओर से कई बार मिल चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी एचसी सेमवाल नामिक की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर दिखते हैं और उम्मीद भी है कि वह अपने स्तर से पहल जरूर करेंगे, लेकिन यदि लोगों की समस्या का समाधान नहीं होता तो फिर अपनी आवाज को दिल्ली तक जरूर पहुंचाएंगे। 
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झूलापुल की हालत खराब
नामिक को जोड़ने के लिए रामगंगा में कीमू के पास जो झूलापुल बना है, उसकी हालत बेहद खराब है। जिलाधिकारी ने लोनिवि को निर्देश दिए कि तत्काल झूलापुल की मरम्मत की जाए, ताकि लोगों को आवागमन में कठिनाई न हो।

चुनाव बहिष्कार भी कर चुके हैं नामिक के लोग
नामिक के लोग चुनाव बहिष्कार जैसा कदम भी उठा चुके हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव के समय नामिक से मतपेटी खाली आई थी। तब भी गांव के लोगों के मुद्दे वही थे जो आज तक जिंदा हैं। गांव की किसी समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ, जबकि विधानसभा के दूसरे चुनाव की तैयारी होने लगी है।
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