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नामिक वालों की जान के लिए आफत बना धारापानी रौली

Sat, 16 Jul 2016 10:34 PM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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नामिक जाने वाले रास्ते में धारापानी रौली - फोटो : अमर उजाला
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नामिक में रहने वालों के लिए केवल सड़क मार्ग से दूरी ही दिक्कतों का कारण नहीं है। बरसात में उफनाने वाले नाले भी नामिक के लोगों की जान के आफत बने हैं। लोग नालों में गिरकर चोटिल होते हैं। नालों में पुलिया बनने का नामिक के लोगों का सपना सरकारी तंत्र की उदासीनता से पूरा नहीं हो पा रहा है।
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मोटर सड़क से 27 किलोमीटर की दूरी एवं समुद्र तल से 2700 मीटर की ऊंचाई पर हीरामणि और नामिक ग्लेशियर की तलहटी पर बसे नामिक के लोगों की परेशानी किसी से छिपी नहीं है। शासन-प्रशासन भी नामिक की दिक्कतों और नामिक के लोगों की नाराजगी से अनजान नहीं है। जून में सड़क के मुद्दे पर 165 किमी की पदयात्रा निकालने की चेतावनी के बाद सरकारी अमला गांव पहुंचा था। सड़क न होने से नामिक के लोगों को वर्षभर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात नामिक के लोगों की मुसीबतें और बढ़ा देती है।

इस समय थल-मुनस्यारी मार्ग के द्वालीगाड़ (बिर्थी) से नामिक को जाने वाला पैदल रास्ता कई जगह खौफनाक बना है। नामिक गांव से 11 किमी दूर धारापानी रौली (पानी का नाला) उफान पर है। लोग जान जोखिम में डालकर रौली को पार कर रहे हैं। बच्चों का बगैर सहायता के रौली को पार करना संभव नहीं है। 122 परिवार वाले नामिक के लोगों को बाजार, बैंक, पोस्टआफिस, अस्पताल, तहसील, ब्लॉक कार्यालय आने के लिए इसी रास्ते का उपयोग करना पड़ता है। बावजूद इसके जानलेवा धारापानी रौली में एक पुलिया तक नहीं बन सकी।
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जहां जरूरत नहीं वहां बन जाती है पुलिया : प्रधान
नामिक की प्रधान तुलसी देवी कहती हैं कि नामिक की दिक्कतों को हमेशा हल्के में लिया जाता है। विकासखंड कार्यालय के माध्यम से नंदाकुंड जाने वाले रास्ते पर पुलिया बनाई गई है। इस रास्ते का उपयोग ही नहीं होता है। खतरनाक धारापानी रौली जहां पुलिया बननी चाहिए, वहां पुलिया नहीं बनाई जा रही।
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