गोबराड़ी-मुवानी नहर बंद होने से इस बार मुवानी घाटी के 3500 नाली खेतों में पानी नहीं पहुंच पाया है। सिंचाई न होने से किसान गेहूं की बुआई नहीं कर पाए हैं। नहर की इस बार बरसात के बाद मरम्मत नहीं हुई। इस कारण मूल से आने वाला पानी बीच में ही रिस रहा है। सब्जियों की सिंचाई के लिए भी संकट पैदा हो गया है।
मुवानी के सामाजिक कार्यकर्ता रमेश बम ने बताया कि मानसून की बारिश समाप्त होने के बाद सिंचाई विभाग हर साल नहर की मरम्मत करता था लेकिन इस बार अब तक मरम्मत नहीं हुई है। गेहूं की बुआई के लिए खेतों में अब तक पानी नहीं पहुंचा है। किसान नहर में पानी चलने की प्रतीक्षा में हैं। उन्होंने कहा कि मुवानी घाटी के किसान इसी नहर पर निर्भर रहते हैं। सिंचाई के साथ साथ सब्जी उत्पादन के लिए नहर के पानी को उपयोग में लाया जाता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कई बार बात की गई लेकिन उन्होंने कोई गौर नहीं किया। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता ललित मोहन उप्रेती का कहना है कि नहर की मरम्मत के लिए मजदूरों की व्यवस्था कर दी गई है। एक दो दिन में काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी कारणवश नहर की मरम्मत के काम में विलंब हो गया है।