चार साल से विवादों में चल रहे मुनस्यारी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पीपीपी मोड से हटाने के लिए लोग लामबंद हो गए हैं। इस अस्पताल का अनुबंध 13 मई 2018 को समाप्त हो रहा है। अनुबंध आगे बढ़ाने की कवायद के बीच शनिवार को अपर सचिव स्वास्थ्य जुगल किशोर पंत और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ऊषा गुंज्याल अस्पताल पहुंचे। इसकी जानकारी होते ही कई संगठनों के साथ ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन पर अव्यवस्थाओं का ठीकरा फोड़ते हुए किसी भी हालत में अस्पताल को पीपीपी मोड में नहीं देने की मांग उठाई।
शासन ने 10 अप्रैल 2014 से अस्पताल को प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) में शील नर्सिंग होम प्राइवेट लिमिटेड बरेली को दे दिया था। अनुबंध समाप्ति की तारीख नजदीक देख नर्सिंग होम के संचालक अनुबंध बढ़ाने को प्रयासरत हैं। इसी कवायद के तहत शनिवार को जैसे ही अपर सचिव स्वास्थ्य और सीएमओ अस्पताल पहुंचे तो वहां लोगों का हुजूम पहुंच गया। लोगों ने अपर सचिव स्वास्थ्य को सौंपे ज्ञापन में अस्पताल प्रबंधन पर आरोपों की झड़ी लगा दी। कहा कि अस्पताल पीपीपी मोड में जाने के बाद से विवादों में रहा। अनुबंध के अनुसार अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ तैनात नहीं किया गया। समय पर वेतन नहीं मिलने पर कई बार अस्पताल कर्मी हड़ताल पर जा चुके हैं। आज भी अस्पताल में नियमानुसार व्यवस्थाएं नहीं हैं। प्रसव कराने तक के लिए 130 किमी दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। लोगों ने अपर सचिव को समय-समय पर की गई स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट और गड़बड़ी से संबंधित दस्तावेज सौंपे।
अव्यवस्थाओं से पीड़ित लोगों ने भी अपर सचिव स्वास्थ्य के सामने अपना पक्ष रखा। अपर सचिव से मुलाकात करने वालों में भाजपा ब्लॉक अध्यक्ष प्रयाग पालीवाल, विधायक प्रतिनिधि कांग्रेस नेता ईश्वर कोरंगा, गोकर्ण मर्तोलिया, हिमांशु धर्मशक्तू, नत्थी राम, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष हीरा चिराल, एनएसयूआई ब्लॉक अध्यक्ष विक्रम दानू, भाजयुमो ब्लॉक अध्यक्ष हिमांशु धर्मशक्तू, मनोहर टोलिया, मान सिंह आदि शामिल थे।
विधायक प्रतिनिधि ने दी आत्मदाह की चेतावनी
मुनस्यारी। धारचूला विधायक हरीश धामी के प्रतिनिधि ईश्वर कोरंगा ने अस्पताल को पीपीपी मोड में देने पर आत्मदाह करने की चेतावनी दी, जबकि भाजपाइयों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। भाजपा ब्लॉक अध्यक्ष प्रयाग पालीवाल का कहना है कि शील नर्सिंग होम को दोबारा अस्पताल संचालन का जिम्मा दिया गया तो अपनी ही सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के 14 अप्रैल के पिथौरागढ़ दौरे पर भी उनके सामने यह मामला रखा जा चुका है।
अपर स्वास्थ्य सचिव, सीएमओ ने माना, खामी हैं
मुनस्यारी। अपर सचिव स्वास्थ्य जुगल किशोर पंत और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ऊषा गुंज्याल ने भी अस्पताल संचालन में खामी की बात स्वीकार की है। अस्पताल के निरीक्षण के बाद अमर उजाला से बातचीत में अपर सचिव स्वास्थ्य ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अनुरूप व्यवस्थाएं नहीं हैं। सीएमओ ने स्वीकार किया कि अस्पताल सरकारी मानकों के अनुरूप नहीं चल रहा है। अपर सचिव ने कहा कि शासन को इस संबंध में रिपोर्ट सौंपी जाएगी।