यहां चल रहे ग्रीष्मोत्सव के दौरान शनिवार को महान सर्वेयर पंडित नैन सिंह और किशन सिंह की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण के बाद उनके कामों को याद किया गया। 27 जुलाई 2004 को पंडित नैन सिंह की याद में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया था। अब इन सर्वेयर बंधुओं के नाम से ही यहां पर माउंटेनियरिंग संस्थान की स्थापना की गई है।
जोहार शौका समिति की ओर से आयोजित किए जा रहे ग्रीष्मोत्सव में आज प्रथम सत्र में सर्वेयर नैन सिंह और उनके भाई किशन सिंह की उपलब्धियों पर ही चर्चा हुई। पूर्व मुख्य सचिव डा. आरएस टोलिया, जोहार शौका समिति के अध्यक्ष दुर्गा सिंह रावत, डा. नारायण सिंह पांगती, श्रीराम धर्मशक्तू, गोकर्ण मर्तोलिया, केदार सिंह मर्तोलिया, देवेंद्र धर्मशक्तू आदि ने कहा कि पंडित नैन सिंह का जन्म 21 अक्तूबर 1830 को मिलम गांव में हुआ था। उन्होंने काठमांडू से ल्हासा तक सर्वे किया था।1868 में उनको रायल ज्योग्राफिक सोसायटी लंदन ने स्वर्ण घड़ी उपहार में प्रदान की थी। 1877 में इसी सोसायटी ने उनको विक्टोरिया गोल्ड मेडल प्रदान किया। उसी वर्ष उनको द सोसायटी आफ ज्योग्राफर्स आफ पेरिस की ओर से स्वर्ण घड़ी दी गई। उनको ब्रिटिश सरकार ने रुहेलखंड मंडल में एक गांव भी दान में दिया था। पंडित नैन सिंह ने 1858 से 1863 तक मिलम गांव में अध्यापन का काम भी किया। वक्ताओं ने बताया कि नैन सिंह ने 1867 में पश्चिमी तिब्बत के थोक जालुंग में सोने के खानों की खोज की थी। रायल ज्योग्राफिकल सोसायटी ने उनकी प्रशस्ति में कहा था कि एशिया का नक्शा बनाने में नैन सिंह का बड़ा योगदान रहा था। इस महान सर्वेयर का 1895 में निधन हो गया था।
डा. टोलिया और दुर्गा सिंह रावत ने कहा कि पंडित नैन सिंह का जैसा काम अब कोई नहीं कर सकता। ग्रीष्मोत्सव के दूसरे सत्र में मुनस्यारी में खुल रहे माउंटेनियरिंग संस्थान पर चर्चा हुई। यह संस्थान खुलने पर यहां साहसिक खेलों की संभावना का विकास होने लगेगा।