मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। मुनस्यारी के मल्ला जोहार के प्रवेश द्वार पर स्थित धापा गांव अब रहने लायक नहीं रह गया है। 1982 से आपदा का दंश झेलते आ रहे इस गांव की जमीन में दरारें पड़ चुकी हैं। कभी इस गांव में हर ओर हरियाली थी। इस खूबसूरत गांव को ऐसी नजर लगी कि अब यह गांव चारों ओर से आपदा की चपेट में है। गांव के अलग-अलग तोकों में रहने वाले 136 परिवारों में से 47 परिवार जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं।
धापा गांव के जिमिघाट तोक में पहले करीब सात परिवार रहते थे। 2005 से गोरी नदी और साईंगाड़ के भू कटाव के कारण अब जिमिघाट उजड़ गया है। अब इस तोक में मात्र दो परिवार हैं। ये परिवार भी आपदा काल में अन्यत्र विस्थापित हो जाते हैं। दूसरा तोक सुरिंगगाड़ है, जहां नौ परिवार की जगह अब सिर्फ चार परिवार रह गए हैं। दानू पौड़ में छह परिवार रहते थे, जो 22 जुलाई की शाम भूस्खलन के कारण विस्थापित हो गए हैं। गांव का मुख्य तोक तल्ला धापा है, जहां अब कोई नहीं रहता है, पहले यहां सात परिवार रहते थे। गांव के बीच में रहने वाले जो परिवार आज तक आपदा से बचे थे, उन्हें भी इस बार की आसमानी आफत ने बेघर कर दिया। सभी परिवार जंगल में शरण लिए हुए हैं।
गांव के पूर्व प्रधान एवं सामाजिक कार्यकर्ता मुन्ना ढोकटी ने बताया कि धापा गांव में लगभग 1982 से हर वर्ष हुमती पानी और छिड़ा तोक से कभी भूस्खलन तो कभी बड़े- बड़े बोल्डरों का गिरना जारी रहता है। बरसात में यह और खतरनाक हो जाता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में धापा गांव में 136 परिवार हैं, जिनमें से 47 परिवारों को शिफ्ट किया गया है। पूरा धापा गांव अब सुरक्षित नहीं रह गया है। सरकार को धापा गांव के विस्थापन एवं पुनर्वास के लिए कोई ठोस कदम उठाने होंगे तभी गांव के लोगों कर जीवन पटरी पर आ सकेगा।
आपदा ले सब चौपट है ग्ये गौं मां
मुनस्यारी। धापा गांव के 90 वर्षीय बुजुर्ग उत्तम सिंह ने कहा कि ‘नाती हमर गौं मां कई साल बिटी हर साल बारिशक में ढुंग पाथर बगी बेर पूरे गौं थे बर्बाद करिदी हल। यू गौं मां हमिल खेत बाड़ी कै आलू, राजमा, पैद हुन छि आब सब चौपट है ग्ये’। (हमारे गांव में हर साल बारिश में पत्थर पूरे गांव और आलू, राजमा की खेती को बर्बाद कर देता है) इस वर्ष की आपदा में धापा तक आवागमन भी बाधित कर दिया है। सेनरगाड पुल के पास भूस्खलन के चलते गांव के लोगों को अस्पताल और बाजार तक आने जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
धापा गांव में आपदा प्रभावितों ने इसतरह टैंट में रखा है सामान।- फोटो : PITHORAGARH