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मुनस्यारी में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे

Wed, 03 Jan 2018 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़/मुनस्यारी
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मुनस्यारी में इन दिनों इस तरह पड़ रहा पाला - फोटो : अमर उजाला
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कड़ाके की ठंड से लोगों को फिलहाल राहत मिलने वाली नहीं है। बुधवार को भी ठंड का प्रकोप बना रहा। जिला मुख्यालय में न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। इसमें मंगलवार की तुलना में मामूली सुधार आया है। मंगलवार को न्यूनतम तापमान 2.0 डिग्री रहा। वहीं, मुनस्यारी में बुधवार को न्यूनतम तापमान माइनस 0.2 डिग्री रहा। मुनस्यारी में ठंड से सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। मुनस्यारी में इतना ज्यादा पाला गिर रहा है कि लोगों को आवागमन में भी दिक्कत हो रही है।

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मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि अभी सूखी ठंड से राहत नहीं मिलेगी। फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं है। यदि बारिश हो जाती तो नमी का स्तर बढ़ जाता और लोगों को सूखी ठंड से राहत मिल जाती। वहीं, जिला मुख्यालय में बुधवार को भी धूप निखरी। इससे अधिकतम तापमान में थोड़ा सुधार आया और यह 16 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। जिले में अब तक शीतकालीन बारिश नहीं हुई है।

दिसंबर मध्य के बाद बारिश की संभावना रहती थी, लेकिन इस बार अब तक बारिश की कोई संभावना नहीं बन पाई है। घाटी वाले इलाकों में सुबह के समय लगने वाले कोहरे से वाहन संचालन में भी दिक्कत आ रही है। थल, मुवानी, जौलजीबी, घाट में कोहरे से सुबह लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। 
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पाले में वाहन रपटने का खतरा
जिले की कई सड़कों पर पाले के कारण वाहनों के रपटने का खतरा बढ़ गया है। थल-मुनस्यारी मार्ग पर कालामुनि के पास जबर्दस्त पाला गिर रहा है। पिथौरागढ़-धारचूला सड़क पर सतगढ़ और कनालीछीना के बीच जमकर पाला गिरने लगा है। गंगोलीहाट-बेड़ीनाग सड़क पर भी कई जगह पाले का खतरा मंडरा रहा है। पिथौरागढ़-टनकपुर मार्ग पर थरकोट के आसपास के इलाके में पाले की मोटी परत जमने लगी है। सड़क निर्माण विभागों ने पाले से खतरे वाले स्थानों पर अब तक चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए हैं।

सब्जियों और फसलों को पहुंचेगा नुकसान 
पाले से सब्जियों और फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचने की आशंका है। पाला कोमल पत्तियों को जला देता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह ने कहा कि सब्जियों और फूलों को पाले से बचाने के लिए पानी लगातार देना चाहिए। साथ ही छोटे पौधों को रात के समय कपड़े या पॉलिथीन से ढंक देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाले से झुलसने वाले पौधे फिर से पनप नहीं पाते। उन्होंने फलों के पौधों के लिए भी इसी तरह का कदम उठाने की सलाह दी है। जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा है, वहां खेतों में लगातार पानी दें।

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