पिथौरागढ़ जिला अस्पताल के बरामदे में लेटे मरीज
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120 बिस्तरों वाले जिला अस्पताल में इस समय 200 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। 15 अगस्त के बाद भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हो गई। ज्यादातर मरीज टाइफाइड, बुखार, खांसी जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं। रोज एक-दो दुर्घटना में घायल भी जिला अस्पताल पहुंचते रहते हैं। अस्पताल में क्षमता से ज्यादा मरीज भर्ती होने से उनके सोने की व्यवस्था बरामदे में करनी पड़ रही है। जनरल वार्ड के बाहर, आर्थो वार्ड के बाहर ऐसे कई मरीजों के बिस्तर लगे हैं। भर्ती होने वाले मरीजों को अस्पताल की ओर से चारपाई और कंबल उपलब्ध कराया जाता है।
बताया गया कि इस बार टाइफाइड के मरीजों की संख्या पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। पिछले साल तक इस सीजन में 150 से 180 मरीज तक ही भर्ती होते थे, लेकिन इस बार यह संख्या अचानक बढ़ गई है। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने की आशंका है। जिला अस्पताल के चिकित्सक डा.नरेंद्र शर्मा ने बताया कि बारिश के मौसम में पानी प्रदूषित हो जाता है, इसलिए पानी को उबालकर और छानकर उपयोग में न लाया जाए तो टाइफाइड की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा मौसम परिवर्तन के समय भी टाइफाइड के रोगी बढ़ जाते हैं।
जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा की सुविधा न होने के कारण मरीजों का दबाव जिला अस्पताल पर ज्यादा रहता है। यहां नेपाल के मरीज भी पहुंचते हैं। इस समय रोजाना एक हजार मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। हर डॉक्टर के सामने मरीजों की भारी भीड़ लगी रहती है। इसके अलावा अस्पताल में नियमित चेकिंग का समय पूरा होने के बाद आपातकालीन कक्ष में भी मरीजों की भीड़ लग जाती है।
फिलहाल ग्रामीण अंचलों में शिविर नहीं लगेंगे
जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ने और डॉक्टरों के व्यस्त होने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण अंचलों में लगने वाले शिविरों को फिलहाल स्थगित कर दिया है। सीएमओ डा. उषा गुंज्याल ने बताया कि जिलाधिकारी सी रविशंकर के आदेश पर अगले कुछ दिनों तक ग्रामीण अंचलों में चिकित्सा शिविर नहीं लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिला पुरुष अस्पताल और महिला अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अग्रिम आदेशों तक ग्रामीण अंचलों के चिकित्सा शिविर स्थगित रहेंगे। इस समय जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों का इलाज प्राथमिकता में रखा गया है।