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Pithoragarh News: बंदर खाएं मक्का-मूंगफली, इंसानों के लिए दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल

Sat, 22 Nov 2025 11:20 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। झूलाघाट के गांवों में हालात ऐसे बन गए हैं कि बंदर मक्का-मूंगफली की दावत उड़ाएं और इंसान दो जून की रोटी के लिए तरसें। खेतों में मेहनत करने वाले किसान अब बेबस हैं। फसल का बड़ा हिस्सा बंदर बर्बाद कर रहे हैं।
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अल्मोड़ा-चित्तागांव सीमा से सटे कानड़ी, बनाड़ा, मजिरकाड़ा, सीमू, ग्वांली, भटेड़ी, अमतड़ी, गेठीगाड़ा, रणवा आदि इलाकों में लोग परेशान हैं। पूरे इलाके में बंदर इतने बढ़ गए हैं कि पूरा दिन खेत-खलिहान इन्हीं का कब्जा रहता है। मक्का, मूंगफली, केला, पपीता, गेहूं या धान, कोई भी फसल उनकी पहुंच से बाहर नहीं। किसानों के मुताबिक भगाने की कोशिश पर बंदर हमला करने से भी नहीं चूकते।

लगातार भारी नुकसान से थके-हारे ग्रामीणों ने अब खेती से दूरी बना ली है। कई परिवार पलायन करने का मजबूर हैं। कई किसान खेतों में केवल मवेशियों के लिए घास या चारा उगाकर काम चला रहे हैं। गांवों में चिंता बढ़ रही है कि अगर यही हाल रहा तो उपजाऊ खेत बंजर हो जाएंगे और लोगों के सामने आजीविका की नई चुनौती खड़ी हो जाएगी।
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किसानों का दर्द
झूलाघाट क्षेत्र में मक्का, केला, पपीते और मूंगफली की पैदावार अच्छी होती है। बंदर इन फसलों को नुकसान पहुंचाकर हमारी मेहनत बेकार कर रहे हैं। ऐसे में खेती छोड़नी पड़ी है। - मदन भट्ट, झूलाघाट
भटेड़ी गांव से ताजी सब्जियां जिला मुख्यालय तक जाती हैं। अब गांव में बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण सब्जी उत्पादन में काफी गिरावट आ रही है। - नरेंद्र सिंह गोबाड़ी, पूर्व बीडीसी सदस्य भटेड़ी
बंदरों की समस्या के चलते सब्जी उत्पादन कम कर दिया है। किसान खेती करने की हिम्मत कर पा रहे हैं। बंदर गोभी, शिमला मिर्च, लौकी, कद्दू, पपीते आदि फसलों को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। - राम सिंह बिष्ट, गेठीगाड़ा


कोट

झूलाघाट क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने के लिए जल्द टीम भेजी जाएगी। इनका बधियाकरण कर इन्हें सुरक्षित स्थानों में छोड़ा जाएगा। - दिनेश जोशी, रेंजर, पिथौरागढ़
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