गणाई गंगोली (पिथौरागढ़)। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावों के बीच सीमांत जिले के अस्पतालों में बंदर के काटने का इलाज नहीं मिल रहा है। तहसील क्षेत्र के बनकोट में एक दिन पूर्व बंदरों के हमले में घायल बच्चे को स्थानीय सीएचसी में इलाज नहीं मिला तो उसे दूसरे जिले अल्मोड़ा जाना पड़ा।
बनकोट क्षेत्र के रुगड़ी गांव में बीते मंगलवार की देर शाम 11 वर्षीय पीयूष पर बंदरों के झुंड ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उसके पैर पर कई जगह पर गहरे जख्म हुए हैं। बच्चे के पिता धरमपाल उसे इलाज के लिए स्थानीय सीएचसी ले गए। यहां एक भी डॉक्टर न होने से उसे प्राथमिक इलाज तक नहीं मिला। यहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर औपचारिकता निभा दी।
परेशान पिता दर्द से कराहते बच्चे को अल्मोड़ा जिले के सेराघाट पीएचसी ले गए। वहं घायल बच्चे के पैर में बने जख्मों पर टांके लगाकर रेबीज का इंजेक्शन लगाया गया। हैरत की बात है कि क्षेत्र की 40 हजार से ज्यादा की आबादी के इलाज के लिए खोले गए सीएचसी में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं हैं। ऐसे में क्षेत्र के मरीजों और गर्भवतियों को जांच और इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
दो डॉक्टरों की व्यवस्था, एक महीने बाद भी नहीं पहुंचे अस्पताल
सीएचसी गणाई गंगोली में तैनात एकमात्र चिकित्सक का दो महीने पूर्व अनुबंध खत्म हो गया तो वे सेवा छोड़कर चले गए। तब से यह अस्पताल चिकित्सक विहीन है। क्षेत्र के लोगों के आंदोलन के बाद स्वास्थ्य विभाग ने यहां व्यवस्था के तहत दो चिकित्सकों को भेजने के निर्देश जारी किए। करीब 30 दिन बीत चुके हैं लेकिन एक भी चिकित्सक यहां नहीं पहुंच सका है। बगैर चिकित्सक के क्षेत्र के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कोट
प्रदेश स्तर पर नए चिकित्सकों की नियुक्ति हो चुकी है। विधानसभा सत्र समाप्त होते ही सीएचसी गणाई गंगोली में चिकित्सकों की नियुक्ति कर दी जाएगी। - डॉ. पवन कार्की, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी गंगोलीहाट