इस तहसील के दरांती गांव में रविवार को ग्रामीण किसानों ने बंदर भगाओ, खेती बचाओ नारे के साथ प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में किसानों ने पहली बार संगठित होकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोला।
कहा कि मुख्यमंत्री ने दो वर्ष पूर्व यहां से चुनाव लड़ते समय ऐलान किया था कि बंदरों और सुअरों से निजात दिलाने के लिए ठोस योजना बनाई जाएगी लेकिन अब तक किसानों को कोई राहत नहीं मिली है। इस बार तो बंदरों का इतना आतंक हो गया कि किसी भी किसान को अपने पेड़ से माल्टा का एक भी दाना नहीं मिला। आक्रोशित लोगों ने कहा कि प्रदेश को विकास के पथ पर आगे ले जाने, लोगों से गांव वापस लौटने की अपील करने वाले मुख्यमंत्री अब तक कोई ऐसी योजना तैयार नहीं कर पाए हैं जिससे खेती को बचाया जा सके।
प्रदर्शन के दौरान हुई सभा में तय किया गया कि अब हर गांव में उत्तराखंड किसान मंच की संयोजन समिति गठित की जाएगी। यह संयोजन समिति सरकार पर बंदरों, सुअरों और आवारा जानवरों से मुक्ति के लिए दबाव बनाएगी। बंदरों के आतंक से बच्चों के लिए गंभीर खतरा हो गया है। यह अक्सर हमला कर देते हैं। प्रदर्शन के समय मौजूद भाजपा नेता और किसान मंच के संयोजक जगत मर्तोलिया ने कहा कि लोगों को संगठित होकर इस आपदा से निपटने के लिए सरकार पर दबाव बनाना होगा। प्रदर्शन में बृजमोहन लोहनी, किशन सिंह जंगपांगी, दुर्गा सिंह कोरंगा, मदन नारायण लोहनी, नारायणी देवी, गायत्री देवी, पार्वती देवी, हरीश चंद्र जोशी, हीरा सिंह समेत भारी संख्या में लोग थे।