पुलिस, प्रशासन पर अभद्रता का आरोप लगाने वाले हंसेश्वर मठ के महंत परमानंद गिरी डीडीहाट क्षेत्र के घनघोर जंगल घनधूरा चले गए हैं। महंत ने डीएम, एसपी और थानाध्यक्ष के घनधूरा आने पर ही मठ (आश्रम) लौटने की बात कही है। बाबा के आश्रम छोड़कर जाने से उनके भक्त मायूस और परेशान हैं।
महंत ने बताया कि 29 फरवरी को वह गुर्जीगाड़ में आश्रम के लिए रोड़ी एकत्र करवा रहे थे। इसी बीच वहां थानाध्यक्ष विद्या दत्त जोशी, तहसीलदार पीसी पंत, वन दरोगा चंद्रशेखर कोठारी पहुंचे। आरोप है कि पुलिस ने उनसे अभद्रता की। तब से वह आश्रम छोड़कर आ गए। बुधवार को फोन पर हुई बातचीत में महंत ने बताया कि वह इस समय घनधूरा के जंगल में हैं। घनधूरा 30 किमी की पैदल दूरी पर है। महंत ने बताया कि उन्होंने बुधवार को रजिस्टर्ड पत्र डीएम, एसपी को भेजा है।
उधर, थानाध्यक्ष विद्या दत्त जोशी का कहना है कि राजस्व पुलिस, रेगूलर पुलिस और वन विभाग की टीम नियमित चेकिंग में थी। बाबा रोड़ी, बजरी एकत्र कर रहे थे। रोड़ी बजरी एकत्र न करने को कहा तो बाबा भड़क गए। बाबा से किसी प्रकार की अभद्रता नहीं की गई। बाबा के भक्त कमान सिंह कठायत, रिटायर्ड कैप्टन कुंवर सिंह धामी, ललित धामी का कहना है कि महंत के जाने से आश्रम सूना पड़ गया है। दो माइयां केवल गिरी, सोमवार गिरी वहां रहती थीं, वह भी कहीं चली गई। प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। उधर, अस्कोट राजवंश के वारिस रजवार भानुराज पाल कहते हैं कि आश्रम वीरान पड़ने से पीड़ा हो रही है, इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए। बता दें कि आश्रम के लिए राजवंश ने ही सैकड़ों नाली जमीन दान में दी थी।