प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड में अपनी आखिरी चुनावी सभा से प्रदेश में कांग्रेस की परेशानी बढ़ा गए। पूर्व सैनिकों और सैनिकों पर फोकस कर मोदी ने पिथौरागढ़ और चंपावत की छह विधानसभाओं को सीधे प्रभावित किया। पिथौरागढ़ में 23865, चंपावत में 4446, बागेश्वर में 11236 और अल्मोड़ा में 13806 पूर्व सैनिक परिवार हैं। अब कांग्रेस की मुसीबत यह है कि इन परिवारों तक कांग्रेस को एक ही चुनाव प्रचार के अंतिम दिन अपने वादे, इरादे के साथ पहुंचना है।
मोदी की जनसभा का जवाब देने के लिए सोमवार को कांग्रेस ने पिथौरागढ़ में ही मुख्यमंत्री हरीश रावत की जनसभा का आयोजन किया है। इस जनसभा में रावत को अब पूर्व सैनिकों को लेकर भी बात करनी होगी। वन रैंक, वन पेंशन पूरी तरह से केंद्र सरकार पर निर्भर है और कांग्रेस इस मुद्दे पर कमियां गिनाने, यूपीए सरकार की कोशिश तक ही सीमित रह पाई है।
मोदी का एक हमला हरीश रावत पर धारचूला सीट छोड़ने को लेकर भी रहा। धारचूला सीट छोड़कर किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ने को लेकर भी हरीश रावत को तस्वीर साफ करनी होगी। केंद्र से पैसे न मिलने के मुख्यमंत्री हरीश रावत के आरोप को भी मोदी ने सिरे से नकारा। ऐसे में हरीश रावत को इस मामले में भी अपनी तरफ से कहना पड़ सकता है। जनसभा के तुरंत बाद ही मोदी प्रभाव को कम करने में कांग्रेस जुट भी गई है। रविवार देर शाम कांग्रेस ने ठीक उन इलाकों में सभाएं कीं जहां से होकर मोदी गुजरे थे। केमू बस अड्डे पर युवक कांग्रेस ने जमावड़ा लगाया।