न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा कय्यूम की अदालत ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम-1940 के अंतर्गत मिस ब्रांड दवा सप्लाई करने के आरोप में तीन सप्लायरों को दो-दो वर्ष की सजा और दस-दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा। तीनों आरोपी गाजियाबाद के हैं।
अभियोजन अधिकारी सुनीता भट्ट ने बताया कि 10 अगस्त 2008 को औषधि निरीक्षक के नेतृत्व में एक टीम ने जिला अस्पताल के मेडिकल स्टोर का निरीक्षण किया था। मेडिकल स्टोर में टैक्सा मैथासोल सोडियम फास्फेट इंजेक्शन मिला। इसे जांच के लिए भेजने पर पता चला कि यह मिस ब्रांड दवा है। यह दवा गाजियाबाद की दवा सप्लाई कंपनी नव कैंप फार्मेसिकल ने उपलब्ध कराई थी। जांच में यह भी पता चला कि दवा नॉट फॉर सेल थी और बिल में कंपनी ने अपना नाम भी नहीं लिखा था।
इस मामले में नव कैंप फार्मेसिकल कंपनी के मालिक नवल अरोरा, पार्टनर रमेश भल्ला और ब्राउन लैबोटिप्स के प्रबंधक एके गुप्ता के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। अदालत ने इस मामले में औषधि निरीक्षक एससी शर्मा, अरविंद कुमार, आरएन प्रजापति को गवाह के तौर पर पेश किया। सभी आरोप सही पाए जाने पर अदालत ने सजा सुना दी।