जिला महिला अस्पताल में एक और प्रसव पीड़िता से दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। डॉक्टरों ने पर प्रसव पीड़िता को बिना देखे हल्द्वानी रेफर करने का आरोप लगा है। हल्द्वानी ले जाते समय महिला ने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दिया। मामला संज्ञान में आने के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
छह दिसंबर को प्रसव पीड़ा होने पर बेड़ीनाग विकासखंड के दूरस्थ गांव दशौली निवासी सुलोचना देवी को उनके ससुर रामीराम थल के सीएचसी लेकर आए थे। सुलोचना को दो दिन अस्पताल में रखने के बाद कर्मचारियों ने उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। नौ दिसंबर की शाम को परिजन सुलोचना को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने प्रसव पीड़िता को भर्ती करने और देखने के बजाय सीधे हल्द्वानी ले जाने की सलाह दे दी। रविवार शाम छह बजे परिजन सुलोचना को 108 वाहन से हल्द्वानी ले जा रहे थे। रास्ते में इग्यारदेवी के पास सुलोचना ने 108 वाहन में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
108 के वाहन चालक ने सुलोचना को तत्काल इग्यारदेवी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उपचार के बाद सोमवार को सुलोचना को छुट्टी दे दी गई। सोमवार को आम आदमी पार्टी राज्य कमेटी के सदस्य चंद्रप्रकाश पुनेड़ा और व्यापार संघ अध्यक्ष शमशेर महर ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कहा कि महिला अस्पताल के कर्मचारियों के व्यवहार से जिले की छवि खराब हो रही है और गरीब तबके के लोग आए दिन इसके चलते परेशान होते हैं। मामले में डीएम सी रविशंकर ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। डीएम ने अपर जिलाधिकारी और सीएमओ से कहा है कि महिला अस्पताल में पिछले जिन दो प्रकरणों की जांच चल रही है, उसमें ताजा मामले को भी शामिल किया जाए।