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सूखी नहर की मरम्मत पर लाखों खर्च हो रहे

Sat, 09 Dec 2017 10:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
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थल के पतेत गांव में वर्षों से सूखी पड़ी नहर - फोटो : अमर उजाला
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चंद्रभागा गधेरे से पतेत और उससे सटे गांवों में सिंचाई के लिए बनाई गई नहर में 1990 के बाद पानी नहीं चला है, लेकिन सिंचाई विभाग हर साल नहर की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च कर रहा है। विभाग के कागजातों में यह नहर चालू दिखाई गई है। इसी कारण गांव के लिए सिंचाई की दूसरी योजना मंजूर नहीं हो पा रही है। अकेले पतेत गांव की 60 हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई के अभाव में फसलों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इस नहर से कौली, रछतिया, ख्वाजाखेत, रजेत, ननतोला गांवों में भी सिंचाई होती थी। वहां पर भी लोगों को इस नहर का पानी नहीं मिल पा रहा है।
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गांव के लोगों की मांग पर 1960 में सिंचाई विभाग ने इस नहर का निर्माण किया था। शुरुआत में तो नहर से ठीकठाक पानी चला और लोगों को सिंचाई की सुविधा मिलती रही। धीरे-धीरे यह नहर टूटती गई और 1990 के बाद इसमें पानी आना बंद हो गया। गांव के लोगों ने बताया कि सिंचाई विभाग बंद पड़ी इस नहर की मरम्मत का प्रस्ताव हर साल तैयार करता है और 1990 से अब तक नहर की मरम्मत पर 59 लाख रुपये खर्च दिखाया गया।

इस मामले में सिंचाई विभाग के अवर अभियंता एलएम उप्रेती का कहना है कि नहर की मरम्मत के लिए इस बार जिला योजना में प्रस्ताव भेजा गया है। धनराशि मिलते ही नहर की मरम्मत कर दी जाएगी और खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा। हर साल मरम्मत के बाद भी नहर में पानी न चल पाने के मामले में वह कोई जवाब नहीं दे पाए। 
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क्या जीरो टौलरेंस का यही मतलब है
पतेत निवासी सुरेश चंद का कहना है कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार रोकने के लिए जीरो टौलरेंस की बात करती है, लेकिन ऐसे मामलों पर सरकार की नजर नहीं जाती। सरकार को जांच करनी चाहिए कि सूखी नहर की मरम्मत के नाम पर कैसे प्रस्ताव बन जाते हैं और कैसे यह धन स्वीकृत हो जाता है। उन्होंने कहा कि नहर की मरम्मत में खर्च हुए धन की जांच होनी चाहिए।

इस नहर को बेकार घोषित करे विभाग
पतेत निवासी कुंदन चंद का कहना है कि सिंचाई विभाग को चाहिए कि वह इस नहर को बेकार घोषित करे, ताकि नई सिंचाई योजना का प्रस्ताव बनाया जा सके। कागजों में इस नहर को चालू दिखाए जाने से दूसरी योजना नहीं बन पा रही है। वह कहते हैं कि पतेत गांव के 62 किसान नहर बंद होने से परेशान हैं। फसलों का उत्पादन लगातार गिर रहा है। किसी को इसकी चिंता नहीं है।
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