पलायन की मार सीमांत जिले के 384 गांवों पर पड़ी है। यहां के 9883 लोगों ने रोजगार एवं अन्य जरूरतों के लिए अपने गांवों को अलविदा कह दिया है। इक्का-दुक्का लोग ही मजबूरीवश गांव में रुके हैं। वहीं, पलायन करने वाले लोग अपनी ज्यादातर पैतृक भूमि बेच चुके हैं। बाकी भूमि बंजर पड़ी है, जबकि उनके घरों पर ताले लटके हैं। उत्तराखंड पलायन आयोग की 30 अप्रैल 2018 को जारी अंतरिम रिपोर्ट में पलायन की यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। इसमें पलायन के मामले में पौड़ी, टिहरी, अल्मोड़ा के बाद पिथौरागढ़ जिला चौथे नंबर पर है।
राज्य में पलायन की वस्तुस्थिति और कारणों का पता लगाने के लिए आयोग ने सर्वे कराया था। सर्वे के मुताबिक चीन और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे इस संवेदनशील जिले के 384 गांवों पर पलायन की मार पड़ी है। इन गांवों के 9883 लोगों ने अपने घर दूसरी जगह बना लिए हैं। गांवों में वीरानगी का आलम यह है कि अधिकतर घरों में ताले लटके हैं। मजबूरीवश घर एवं जमीन की देखभाल के लिए इक्का-दुक्का परिवार और ज्यादातर बुजुर्ग सदस्य ही गांवों में बचे हैं। इसके अलावा जिले में 589 गांव भी पलायन की कगार पर हैं। इन गांवों से अस्थायी पलायन हुआ है। इन गांवों की 31,786 आबादी पलायन कर चुकी है। हालांकि उनका मूल गांव में आना-जाना लगा रहता है।
सर्वे में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान ने पहाड़ी जिले में आर्थिक अवसरों और मूलभूत सुविधाओं की कमी को पलायन का जिम्मेदार ठहराया है, जबकि रोजगार को पलायन का सबसे बड़ा कारण माना गया है। इसके मुताबिक आजीविका के लिए सबसे अधिक 42.81 फीसदी लोगों ने घर छोड़ा। शिक्षा के लिए 19.15 फीसदी, चिकित्सा के लिए 10.13 फीसदी, बिजली, पानी, सड़क आदि सुविधाओं के अभाव में 4.97 फीसदी, जंगली जानवरों से नुकसान के चलते 4.8 फीसदी, कृषि भूमि की पैदावार में कमी से 4.66 फीसदी ने घर छोड़ा, जबकि अन्य कारणों से 11.48 फीसदी और दूसरों की देखादेखी 2.36 फीसदी लोगों ने घर छोड़ा।
जिले के 75 गांव हुए निर्जन
पलायन के चलते जिले के 75 गांव निर्जन हो गए हैं। पलायन आयोग के सर्वे में मूलभूत जरूरतों का अभाव इन गांवों के निर्जन होने के कारण के रूप में उभरकर सामने आया है। सड़क का अभाव, बिजली न होना, पेयजल स्रोतों की दूरी, स्वास्थ्य केंद्र न होने के चलते लोगों ने गांव छोड़ दिया। इनमें गंगोलीहाट विकास खंड के सर्वाधिक 55 गांव शामिल हैं। मुनस्यारी के छह, मूनाकोट के पांच, विण और धारचूला के तीन-तीन, कनालीछीना के दो, बेड़ीनाग विकास खंड का एक गांव शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे आठ गांव निर्जन
पलायन के चलते निर्जन हुए सर्वाधिक गांवों में पिथौरागढ़ जिले की चीन और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे मुनस्यारी, धारचूला और मूनाकोट विकास खंड के आठ गांव शामिल हैं। इन गांवों की अंतरराष्ट्रीय सीमा से हवाई दूरी पांच किमी से कम है। इन गांवों के निर्जन होने से सीमा पर एक अहम सुरक्षा पंक्ति कमजोर हुई है।
पलायन के जो कारण निकलकर आए हैं, उनकी रोकथाम के लिए एक्शन प्लान बनाने के निर्देश शासन की ओर से मिले हैं। रोजगार बढ़ाने की दिशा में कार्ययोजना बनाई जा रही है। ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाएं जुटाई जा रही है।
-सी रविशंकर, डीएम पिथौरागढ़