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पलायन, आपदा का मुद्दा किसी राजनीतिक दल के एजेंडे में नहीं

Fri, 03 Feb 2017 10:20 PM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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मुद्दा - फोटो : अमर उजाला
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पलायन, आपदा जैसे मुद्दे राजनीतिक दलों के एजेंडे में दिखाई नहीं दे रहे हैं। राजनीतिक दलों का चुनावी अभियान आरोप-प्रत्यारोप तक सिमटता नजर आ रहा है।
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चीन और नेपाल सीमा से सटा पिथौरागढ़ जिला पलायन की जबरदस्त मार झेल रहा है। सुविधाओं के अभाव के साथ ही जंगली जानवरों के आतंक के कारण लोग पुरुखों की माटी से दूर हो रहे हैं। जंगली जानवर खेती को तो चौपट कर ही रहे हैं। जंगली जानवरों के हमले भी ग्रामीणों को झेलने पड़ते हैं। नए साल के पहले महीने में ही जंगली जानवरों का हमला देखने को मिला है। नाचनी के नापड़ गांव में 26 जनवरी को दो भालुओं ने एक व्यक्ति पर हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया। ऐसे हमले हर साल होते हैं। राज्य बनने के बाद किसी भी राजनीतिक दल ने पलायन को रोकने के लिए कदम उठाना तो दूर पलायन की विभीषिका को समझने तक का प्रयास नहीं किया। खाली होते गांव न केवल पहाड़ के लिए नुकसानदेह हैं, बल्कि देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी यह खतरनाक है। पलायन इन चुनावों में भी मुद्दा बनते दिखाई नहीं दे रहा है।

सीमांत जिले का दूसरा अहम मुद्दा बरसात की आपदा है। आपदा हर बरसात में इस जिले को गहरे जख्म देती है। हाल के वर्षों की बात करें तो वर्ष 2007 में धारचूला तहसील के बरम क्षेत्र में भूस्खलन से 15 लोग जमींदोज हो गए थे। वर्ष 2009 का ला, झेकला हादसा भुलाया नहीं जा सकता। इस हादसे में 43 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2013 की आपदा ने धारचूला, मदकोट, जौलजीबी, झूलाघाट को गहरा झटका दिया। इस आपदा में 26 लोगों की जान गई। वर्ष 2013 की आपदा से अब तक जिला उबर नहीं पाया है। 30 जून, 1 जुलाई 2016 को बस्तड़ी और कुमालगौनी में भूस्खलन से 23 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। आपदा से कैसे बचाव होगा, यह भी चुनावी बहस का मुद्दा नहीं बन पा रहा है, जो चिंता का विषय है। चुनाव केवल और केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सिमटता नजर आ रहा है।
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उक्रांद के एजेंडे में पलायन का मुद्दा शामिल
क्षेत्रीय दल उक्रांद के एजेंडे में जरूर पलायन का मुद्दा शामिल दिखाई दे रहा है। उक्रांद नेता एवं डीडीहाट से चुनाव लड़ रहे काशी सिंह ऐरी कहते हैं कि पहाड़ के संसाधनों का उपयोग कर पलायन पर रोक लग सकती है। जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप को रोकने के लिए ठोस रणनीति की दरकार है। इससे जंगली जानवरों को आतंक कम होगा। कहते हैं उनका दल इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रहा है।
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