संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़। कोरोनाकाल में रोजगार खत्म होने के बाद वापस पहाड़ लौट रहे प्रवासियों के सामने खेतीबाड़ी, व बागवानी से स्वरोजगार शुरू करना बेहतरीन अवसर है पर इसमें चुनौतियां भी कम नहीं है। पहले ही जंगली जानवरों के आतंक और बे-मौसम बारिश और सूखे से पहाड़ में खेतीबाड़ी और बागवानी से लोगों का मोह भंग होता जा रहा है। अब नये सिरे से खुद को रोजगार उपलब्ध कराने में प्रवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। कोविड-19 के कहर के बाद सीमांत जनपद में बड़ी संख्या में प्रवासी रोजगार छिनने के बाद घरों को लौट रहे हैं। अब इन प्रवासियों के सामने खुद और परिवार के भरण पोषण की चुनौती बढ़ गई है। सीमांत जनपद पिछले 20 सालों से जंगली जानवरों और मौसम की बेरूखी से खेती का रकबा लगातार घटता आया है। 20 साल पूर्व करीब 60 हजार हेक्टेयर में खेती बाड़ी की जाती थी, लेकिन लगातार हो रहे पलायन और जंगली जानवरों के खेती उजाड़ने के बाद अब सिर्फ 42 हजार हेक्टेयर में ही रवि और खरीफ की फसल बोई जाती है। किसानों की सारी मेहनत जंगली जानवरों और मौसम की बेरूखी से धरी-की धरी रह जाती है। इन सालों पशुपालन से भी लोगों का मोह भंग होता जा रहा है। पहाड़ों में लोग दूध,दही, घी के अच्छे दाम नहीं मिलने के कारण पशुपालन व्यवसाय भी लगातार छोड़ रहे हैं। ऐसे में प्रवासियों के सामने कई चुनौतियां हैं।
---:::: सब्जी और फलों का उत्पादन करना चुनौती :: पिथौरागढ़। रोजगार की तलाश में गांवों से शहर लौटने के बाद कई प्रवासी पहाड़ नहीं लौटे। जिस कारण घरों के आसपास घने-घने जंगल हो गए हैं। नतीजतन, जंगली सुअर, बंदर, लंगूर व अन्य जानवरों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। अब कोई प्रवासी सब्जी और फल उत्पादन करना चाहता है तो उसके सामने सिंचाई और जानवरों की समस्या चुनौती बनी हुई है। पहले ही जंगली जानवर पहाड़ों की बागवानी उजाड़ चुके हैं।
--:: चार हजार हेक्टेयर में ही सिंचाई की व्यवस्था:: पिथौरागढ़। जिले में खेती का रकबा 42 हजार हेक्टेयर है। जिला कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने बताया कि करीब 4 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की व्यवस्था है और 38 हजार हेक्टेयर असिंचित क्षेत्र है।
--:::: बागवानी और सब्जी उत्पादन उद्यान विभाग करेगा मदद ::; पिथौरागढ़। जिला उद्यान अधिकारी आरएस वर्मा ने बताया कि कोई भी प्रवासी सब्जी और बागवानी उत्पादन करना चाहेगा तो उसकी पूरी मदद की जाएगी। प्रवासियों को सब्सिडी में फलों के पौधें और सब्जियों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।