पिथौरागढ़। सबकुछ ठीक रहा तो जिले के मनोरोगियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी और उन्हें मैदानी क्षेत्रों के चक्कर नहीं काटने होंगे। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में पहला मानसिक चिकित्सालय खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। बकायदा विभाग ने अपनी ही जमीन पर मानसिक चिकित्सालय खोलने का प्रस्ताव तैयार कर इसे शासन में भेजा है।
जिले में न तो मानसिक चिकित्सालय है और ना ही मानसिक रोग विशेषज्ञ। मानसिक रोगियों को जिले में सिर्फ मानसिक रोग चिकित्सक से परामर्श लेने की सुविधा मिल रही है। ऐसे में बेहतर इलाज के लिए मनोरोगियों को मैदान के बड़े अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मनोरोगियों और उनके परिजनों की इस तकलीफ को समझते हुए जिले में पहला मानसिक चिकित्सालय खोलेगा। सदर पशु चिकित्सालय के पास बंद हो चुके संक्रामक रोग चिकित्सालय में मानसिक चिकित्सालय को अस्तित्व में लाने की तैयारी है। विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन में भेजा है जिसे जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
विभाग के मुताबिक, मनोरोग चिकित्सक से परामर्श लेने रोजाना औसतन 15 से 20 मानसिक रोगी टीबी अस्पताल पहुंचते हैं। गंभीर स्थिति के मरीजों को रेफर करना ही एकमात्र विकल्प है। मानसिक चिकित्सालय खुलेगा तो इसमें मनोरोग विशेषज्ञ तैनात होंगे और रोगियों को स्थानीय स्तर पर भर्ती करने के साथ ही बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी।
मानसिक रोगियों की तकलीफ बढ़ा रहा है सिस्टम
जिले के मानसिक रोगी व्यवस्थाओं की मार सह रहे हैं। मानसिक रोगियों को जिला अस्पताल में पर्ची कटवानी पड़ रही है और परामर्श के लिए उन्हें आधा किलोमीटर दूर टीबी अस्पताल जाना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए कि जिले में तैनात एकमात्र मानसिक रोग चिकित्सक को टीबी अस्पताल का प्रभार दिया गया है। यह जिला क्षय रोग अधिकारी का दायित्व भी संभाल रहे हैं। पूर्व में इलाज के लिए पहुंचने वाले मानसिक रोगियों के लिए टीबी अस्पताल में ही पर्ची काटने की व्यवस्था थी जिसे अब बंद कर दिया गया है। अब विभाग ने जिला अस्पताल में ही पर्ची काटने की व्यवस्था लागू की है इससे मानसिक रोगियों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
-संक्रामक रोग चिकित्सालय में मानसिक अस्पताल खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस अस्पताल के खुलने से जिले के मानसिक रोगियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिल सकेगा।
-डॉ. जेएस चुफाल, सीएमओ, पिथौरागढ़