अपने पहाड़ पर नदी-नालों को पार करने के लिए पुल-पुलिया बड़ा सहारा हैं। इन्हीं पुलों से होकर वाहन गुजरते हैं, लेकिन इस समय जिले में थल, नाचनी के साथ ही जौलजीबी-मदकोट जाने वाले मार्ग पर कई पुलों की हालत खस्ता है। पुलों की हालत इस कदर खराब है कि इनमें एक समय में एक ही वाहन गुजर सकते हैं।
एक फरवरी 2017 को गणाईगंगोली के रामपुर-नैनी सड़क पर नियोलियासेरा में बना मोटर पुल भरभराकर नदी तल पर जा गिरा था, उस समय पुल से दो लोडेड ट्रक गुजर रहे थे। इस हादसे में पुल पर बैठे दो नौजवानों की जान चली गई थी, लेकिन अब तक नियोलियासेरा में नया पुल बनना तो दूर काम शुरू तक नहीं हो पाया है। कुलूर नदी के तल से यातायात का संचालन हो रहा है।
लोगों ने पैदल आवागमन के लिए नदी तल पर पत्थर बिछाकर पैदल मार्ग तैयार किया है। यह पैदल मार्ग और नदी तल से आवागमन के लिए बनाया गया वैकल्पिक मोटर मार्ग बरसात में बह जाएगा, नतीजतन नियोलियासेरा, नैनी, ग्वासीकोट, ननोली, पिलखी समेत कई गांवों के लोगों के सामने यातायात की दिक्कत खड़ी हो जाएगी। बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाएंगे।
थल, नाचनी के पुल जर्जर
थल/नाचनी। थल की रामगंगा नदी में वर्ष 1962 में बना मोटर पुल जर्जर स्थिति में पहुंच गया है। पुल के चार बैरिंग में दशकों से ग्रीसिंग नहीं हुई है। नियोलियासेरा की घटना के बाद विभाग ने पुल से एक समय में एक ही वाहन ले जाने का चेतावनी बोर्ड लगा दिया। पुल से धीमी गति से वाहन ले जाने की हिदायत बोर्ड में दी गई है। पुल से ओवरलोड वाहनों को ले जाने पर भी रोक है। इसी तरह थल-मुनस्यारी सड़क पर नाचनी भुजगड़ नदी में वर्ष 1962 में बने मोटर पुल के स्टील गार्डर गल चुके हैं।
चामी, मदकोट में लकड़ी के पुलों से यातायात संचालन
मुनस्यारी। मुनस्यारी-मदकोट-जौलजीबी सड़क पर चामी और मदकोट में लकड़ी के पुलों से यातायात संचालित होता है। इन पुलों के स्थान पर नए पुल प्रस्तावित हैं। मुनस्यारी में बोगड्यार में पैदल पुलिया क्षतिग्रस्त है। लिंगुरानी में पैदल पुलिया टूटी है। रालम रूट के लिंगुरानी गधेरे में आरपार करने के लिए पिल्थी नामक स्थान पर लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनाई गई है।
इन पुलों की हालत ठीक
पिथौरागढ़ का घाट, पनार, गणाईगंगोली का सेराघाट, बांस, मुनस्यारी के भदेली, सेरा, सेराघाट, सेविला, दरांती, पटकली, बलमरा, नाचनी के बिर्थी, बांसबगड़, मसूरीकांठा, दुलियाबगड़, अस्कोट के चर्मा, हचीला, पिनौड़ागाड़, धारचूला के जौलजीबी पुल के साथ ही रामेश्वर, जौलजीबी, झूलाघाट, धारचूला, बलुवाकोट के झूलापुलों की हालत सही है। इनमें से धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट और झूलाघाट के झूलापुल नेपाल को जोड़ते हैं।
गणाईगंगोली का नियोलियासेरा पुल लोनिवि के अधीन था। डीएम के आदेश पर पुल विश्व बैंक डिवीजन को हस्तांतरित हुआ है। डीएम के निर्देश पर पुल की डीपीआर तैयार की जा रही है। 3-4 महीने के भीतर नियोलियासेरा पुल के लिए धन मिलने की उम्मीद है। धन मिलते ही नया पुल बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
-अरुण पांडे, अधिशासी अभियंता, विश्व बैंक डिवीजन