पिथौरागढ़। आइस संस्था के पर्वतारोही मनीष कसनियाल (26) विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर देश का झंडा लहराएंगे। भारतीय पर्वतारोहण संस्थान (आईएमएफ) के बैनर तले अभियान के तहत 12 पर्वतारोहियों का दल एवरेस्ट के साथ ही तीन अलग चोटियों पर आरोहण का प्रयास करेगा। इनमें से दो चोटियों पर कोई भारतीय नहीं चढ़ सका है।
आईएमएफ का यह पर्वतारोहण अभियान एक अप्रैल से शुरू होगा। इसके लिए कासनी के मनीष का चयन हुआ है। अभियान के तहत देश के 12 पर्वतारोही 8848 मीटर ऊंचे एवरेस्ट, 8516 मीटर के ल्होत्से, 7864 मीटर के नूपसे, 7161 मीटर ऊंचे पुमोरी पर्वत चोटियों को फतह करेंगे। इस अभियान के लिए आईएमएफ ने वर्ष 2019 से शुरुआत की थी। इसके लिए देशभर से 300 आवेदन आए थे। इनमें से ग्राउंड ट्रेनिंग के लिए 110 पर्वतारोहियों का चयन हुआ। इसके दूसरे चरण में 55 और 2020 में हुए अंतिम चरण के चयन में 12 पर्वतारोहियों का चयन अभियान के लिए हुआ। इनकी चार टीमें बनीं हैं। इनमें दो टीमों में चार-चार और दो टीम दो-दो सदस्यों की है। कोरोना के कारण अभियान 2020 में शुरू नहीं हो सका। अब मनीष 15 मार्च को पिथौरागढ़ से दिल्ली रवाना होंगे। एक अप्रैल से वह इन चार चोटियों के फतह करने के लिए नेपाल में पूर्वाभ्यास करेंगे। ये अभियान दुनिया का पहला ऐसा अभियान है, जब 12 पर्वतारोही एक साथ चार पर्वतों को फतह करेंगे। पहले पहले नूपसे, पुमोरी और बाद एवरेस्ट और ल्होत्से को फतह किया जाएगा। अभियान जून में खत्म होगा। मनीष सिक्किम मनीता प्रधान के साथ एवरेस्ट फतह करेंगे जबकि गढ़वाल की सविता कंसवाल ल्होत्से फतह करेंगी।
बासू और जया से सीखीं पर्वतारोहण की बारीकियां
पिथौरागढ़। मनीष ने पर्वतारोही आईस संस्था के बासू पांडेय और जया पांडेय से पर्वतारोहण की बारीकियां सीखीं हैं। बचपन से ही मनीष को साहसिक खेलों में रुचि थी। इसके बाद उन्होंने आइस संस्था में प्रशिक्षक बासू और जया से पर्वतारोहण का हुनर सीखा। मनीष की पहल पर ही आइस संस्था ने भुरमुनी में पहली बार वॉटर फॉल रैपलिंग की शुरुआत की थी। मनीष के पिता सुरेश चंद्र कसनियाल, माता ममता कसनियाल, बहन हिना उनके चयन से बेहद उत्साहित हैं। बताया कि एवरेस्ट फतह करना मनीष का सपना है। (संवाद)
मनीष ने फतह की हैं एक दर्जन से अधिक पर्वतमालाएं
पिथौरागढ़। त्रिशूल, गंगोत्री तृतीय, बलजोरी, लामचीर, बीसी रॉय आदि एक दर्जन से अधिक पर्वत मालाएं वर्ष 2017, 18, 19 में फतह हुईं हैं। वर्ष 2018 में मनीष और ब्रिटिश पर्वतारोही जॉन जेम्स कुक ने 5782 मीटर ऊंची मुनस्यारी की चोटी नंदा लपाक को पश्चिमी छोर से फतह किया था। इस अभियान में उन्हें एक सप्ताह लगा था। वह गढ़वाल में त्रिशूल और लद्दाख में स्टोक कांगड़ी तक गए। इसके लिए मनीष को दो बार राज्यपाल पुरस्कार और राज्य स्वच्छता गौरव सम्मान भी मिल चुका है। मनीष बिर्थी में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए हुई आइस संस्था की वॉटरफॉल रैपलिंग का हिस्सा भी रहे हैं। (संवाद)
मनीष कसनियाल प्रशिक्षक बासू पांडेय के साथ।- फोटो : PITHORAGARH