भारत और नेपाल को विभाजित करने वाली महाकाली से इन दिनों धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है। इन स्थानों पर खनन का कोई पट्टा जारी नहीं किया गया है। दिनभर रेत एकत्र कर उसे रात में छोटी और बड़ी गाड़ियों से जिला मुख्यालय भेजा जा रहा है। पूरे रास्ते में भी इन वाहनों की कोई चेकिंग नहीं होती।
गेठीगाड़ा और कानड़ी के बीच के इलाके में यह खनन हो रहा है। इसके अलावा नदी के किनारे से लोग स्थानीय निर्माण कार्यों का हवाला देकर रोज खनन के काम में लगे रहते हैं। महाकाली के किनारे लगातार हो रहे खनन से नदी का रुख भी बदलता जा रहा है। आशंका है कि बारिश के सीजन में नदी का प्रवाह बढ़ जाएगा और किनारे के हिस्से में भू-कटाव की आशंका बढ़ जाएगी। महाकाली के किनारे कानड़ी, गेठीगाड़ा, तालेश्वर, झूलाघाट, सीमू, बलतड़ी, ध्याण, हल्दू आदि गांव आते हैं। इन गांवों के लिए महाकाली का खतरा हमेशा बना रहता है। एसडीएम अनुराग आर्य ने कहा कि महाकाली में कुछ स्थानों पर ही खनन की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अवैध तरीके से खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। चेकिंग के लिए जांच टीम भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर सख्ती से अंकुश लगेगा और झूलाघाट की तरफ से पिथौरागढ़ जाने वाले खनन सामग्री वाले वाहनों की रात में चेकिंग की जाएगी।