महाकाली के उद्गम स्थल कालापानी में जमी बर्फ
- फोटो : अमर उजाला
समुद्र सतह से 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कालापानी से निकलने वाली महाकाली अब अपने उद्गम से 23 किलोमीटर के दायरे में जमने लगी है। कालापानी से गर्ब्यांग तक महाकाली का प्रवाह भारी ठंड के कारण थम गया है। महाकाली की सहायक कुटी यांग्ती नदी भी कुछ स्थानों पर जमने लगी है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित आईटीबीपी की लगभग सभी अग्रिम चौकियों के लिए बिछाई गई पेयजल लाइनें जम गई हैं। उनसे पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। 12 दिसंबर को इन इलाकों में हुए भारी हिमपात के कारण तापमान शून्य से 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
महाकाली का जलस्तर अब अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। अधिकांश स्थानों पर नदी का प्रवाह नजर नहीं आ रहा है। यह बात अलग है कि गर्ब्यांग से नीचे गर्म घाटी में उतरते नदी का बहाव नजर आने लगता है। कालापानी, नाभीढांग, गुंजी, कुटी समेत कई इलाकों में इस समय भारी बर्फ जमा है। कुटी यांग्ती नदी गुंजी में महाकाली से मिलती है। कुटी से आगे निकलते ही बर्फ से इस नदी का प्रवाह भी थम गया है। कालापानी में जहां से महाकाली का उद्गम होता है वहां पर काफी मात्रा में बर्फ जमा है। कालापानी के पास महाकाली नजर ही नहीं आ रही है। महाकाली भारत और नेपाल की सीमा विभाजन का काम करती है। अधिकांश स्थानों पर नदी के स्थान पर बर्फ की मोटी चादर बिछने से इस सीमा का अंदाजा लगा पाना मुश्किल हो रहा है।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस सातवीं वाहिनी के सेनानी महेंद्र प्रताप ने बताया कि महाकाली का प्रवाह इस समय कई स्थानों पर नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने अग्रिम चौकियों से मिली जानकारी के अनुसार बताया कि अग्रिम चौकियों में पेयजल सप्लाई बाधित हो गई है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रतिकूल मौसम को देखते हुए हाई अलर्ट घोषित किया गया है और जवानों से गश्त करने समय सावधानी बरतने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि जवान पूरे इलाके में गश्त कर रहे हैं। इस समय इस इलाके में आम लोगों की आवाजाही नहीं होती। गांवों के लोग मौसमी प्रवास पर घाटियों की तरफ जा चुके हैं।