हाइकोर्ट के आदेश के बाद राज्य में खनन कार्य बंद होने से खच्चर पालकों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। खच्चर पालक रोजगार की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह घूमने पर मजबूर हैं। बागेश्वर के रीमा एवं खनौली क्षेत्रों में खनन बंद होने से खच्चर पालक दारमा और व्यास घाटी का रुख कर रहे हैं। अब तक खच्चर पालक बागेश्वर जिले की खड़िया खदानों में काम कर रहे थे। उनका कहना है कि खच्चर पालकों के लिए भी राज्य में नीतियां बननी चाहिए।
धारचूला के खच्चर पालक राजेंद्र सिंह कुंवर ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद खनन बंद होने से उनके सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है। अब परिवार का लालन-पालन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राजेंद्र ने बताया कि अब वह रोजगार की तलाश में दारमा घाटी का रुख करने पर मजबूर हो गए हैं। दारमा में आईटीबीपी और सेना का सामान ढोकर परिवार का लालन-पालन करेंगे। खच्चर पालक किशन सिंह बोनाल ने बताया कि वह अपने 50 खच्चरों को लेकर व्यास घाटी और कैलाश मानसरोवर मार्ग पर रोजगार की तलाश करेंगे।
उन्होंने बताया कि उनके अन्य तीन साथी पहले ही 80 खच्चरों के साथ कैलाश मानसरोवर मार्ग का रुख कर चुके हैं। खनन बंद होने से जीवनयापन करने में मुश्किलें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार को हस्तक्षेप कर खच्चर पालकों के हित में निर्णय लेने चाहिए।